राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण : सवालों के घेरे में है बैंकिंग व्यवस्था, एसआईटी की जांच में खुल रहीं सेंधमारी की परतें

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, एसबीआई और गणना व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल

धीरेंद्र सिंह, लखनऊ/अमृत विचार: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की गड़बड़ी का मामला अब केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे जांच का फोकस संस्थाओं की जवाबदेही पर केंद्रित होता जा रहा है। सबसे अधिक सवालों के घेरे में मंदिर परिसर में स्थापित दानपात्रों की सुरक्षा, नगदी और जेवरात की चोरी या गबन को लेकर देश के सबसे बड़े बैंकिंग संस्थान भारतीय स्टेट बैंक की प्रक्रिया में सेंधमारी है।

रामलला का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि दानपात्र, बैंकिंग प्रक्रिया, रिकॉर्ड और निगरानी की पूरी व्यवस्था मौजूद थी, तो फिर श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर सवाल खड़े कैसे हुए? इस प्रश्न का उत्तर अब एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट ही दे सकेगी। तब तक जांच के दायरे में आए किसी भी व्यक्ति या संस्था की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना तय है कि इस पूरे प्रकरण ने मंदिर प्रबंधन, बैंकिंग जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

एसआईटी की अब तक की पड़ताल में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह उभरकर सामने आया है कि यदि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच दानपात्र खोलने, नगदी और जेवरात की गणना करने और उसे अभिलेखों में दर्ज कर सुरक्षित बाहर ले जाने की व्यवस्था निर्धारित थी, तो कथित गड़बड़ियां आखिर संभव कैसे हुईं? जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यही वह बिंदु है जिस पर एसआईटी सबसे अधिक गंभीरता से मंथन करके असली गुनहगार का चेहरा बेनकाब करने जा रही है। यहां ट्रस्ट के प्रतिनिधि की जिम्मेदारी यह थी कि बैंक की गणना और आभूषण की गिनती और मात्रा सही ढंग से हो और उसकी रसीद और रजिस्टर पर बैंक प्रतिनिधि के हस्ताक्षर कराए।

ट्रस्ट द्वारा दानपात्रों से प्राप्त नगदी और आभूषणों की गणना और सुरक्षित परिवहन की जिम्मेदारी बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से तय की गई थी। ट्रस्ट के गठन के साथ ही देश के कई बैंक आफर लेकर अयोध्या से दिल्ली तक चक्कर काट रहे थे। लेकिन इसका जिम्मा मिला भारतीय स्टेट बैंक को, उसके महाप्रबंधक से लेकर बड़े-बड़े अधिकारियों ने अयोध्या आकर रामलला के मंदिर में आने वाले नकदी से लेकर आभूषण आदि चढ़ावे के साथ राममंदिर निर्माण को लेकर मिलने वाले चंदे की पाई-पाई सुरक्षित और संरक्षित रखने का विस्तृत एमओयू किया। हर दानपात्र के ताले की चाबी बैंक के पास थी, दो बार ताला खोलने से लेकर गणना करने का जिम्मा बैंक का था। ज्यादा चढ़ावा आने पर बैंक ने गणना कार्य में टीसीएस के साथ एमओयू किया।

अब एसआईटी की जांच के केंद्र में है सबसे अहम सवाल यह भी है कि क्या बैंकिंग प्रक्रिया से लेकर निर्माण कार्य में क्या 15 सदस्यीय ट्रस्ट में चढ़ावे की निगरानी वास्तव में सीमित लोगों तक सिमट गई थी, या समितियों की सामूहिक जवाबदेही प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई?

इन सवालों से रामलला के गुनहगारों को नसीब होगी जेल

रामलला के गुनहगारों को एसआईटी जांच में आरोपियों को जेल भेजने के लिए कई अहम सवालों के जबाव तलाशे जा रहे हैं। जिमसें दानपात्र खोलने के समय कौन-कौन मौजूद रहता था? नगदी और जेवरात की गणना कौन करता था? गणना का रिकॉर्ड किसके पास रहता था? परिसर से बाहर सामग्री ले जाने की जिम्मेदारी किसकी थी? गणना करने वाले लोगों का चयन किस प्रक्रिया से हुआ? यदि गणना का दायित्व बैंक के अधीन था, तो फिर ट्रस्ट अथवा अन्य कर्मचारियों की भूमिका क्या थी?

एसआईटी के सामने सबसे बड़ा प्रश्न

जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि एसआईटी यह समझने का प्रयास कर रही है कि जिन लोगों को नगदी गिनने की जिम्मेदारी दी गई, वे आखिर किसकी जवाबदेही में काम कर रहे थे। यदि वे बैंक की ओर से नियुक्त थे, तो उनकी निगरानी की जिम्मेदारी बैंक की बनती है। यदि वे ट्रस्ट से जुड़े लोग थे, तो बैंक ने उन्हें अपनी प्रक्रिया में शामिल करने की अनुमति कैसे दी? यदि किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को लगाया गया था, तो उस एजेंसी के चयन, सत्यापन और निगरानी की जवाबदेही किसकी थी? यही कारण है कि बैंक अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की गई है।

डॉ. अनिल मिश्रा से इन सवालों के तलाशे गए जवाब

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से यह जानने का प्रयास किया है कि क्या वे दानपात्र खोलने अथवा गणना की प्रक्रिया के समय मौजूद रहते थे? यदि मौजूद रहते थे तो उनकी भूमिका क्या थी? क्या गणना करने वाले कर्मियों के चयन में उनकी कोई भूमिका थी? क्या किसी प्रकार के निर्देश या निगरानी की व्यवस्था उनके स्तर से की जाती थी? उनके जवाब के बाद जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और उपस्थिति संबंधी रिकॉर्ड का भी मिलान कर रही हैं।

वीडियो फुटेज बन सकती है सबसे बड़ा साक्ष्य

जांच से जुड़े सूत्रों का मानना है कि मंदिर परिसर में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज पूरे प्रकरण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। यदि फुटेज में ऐसे लोग नगदी अथवा जेवरात के संपर्क में दिखाई देते हैं जिनकी अधिकृत भूमिका निर्धारित नहीं थी, तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी इसी दिशा में तकनीकी विश्लेषण करा रही है।

पुजारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल

जांच के दौरान कुछ ऐसे बिंदु भी सामने आए हैं जिनमें कुछ आभूषणों के इधर-उधर होने या उन्हें अलग-अलग लोगों तक पहुंचने के दावे किए गए हैं। जौनपुर के कारोबारी अजय विश्वकर्मा ने रामलला को चांदी की चरण पादुका और हार चढ़ाया था, लेकिन आज तक उन्हें चढ़ावे की रसीद नहीं मिली और हैरानी कि बात ये है कि अब ना रत्नों से जड़ा हार मिल रहा है, ना चरण पादुकाएं।

एसआईटी को ऐसे तमाम दानदाताओं के नाम और फोटो-वीडियों और तत्समय की खबरें भी मिली हैं। लेकिन यह सब बैक रिकार्ड और लाकर में नहीं हैं। कभी मुख्य पुजारी ने कहा कि मैने टिन्नू यादव को दिया तो कभी पुजारी ने किसी ट्रस्टी या उसके साथ रहने वाले पर आभूषण ले जाने की बात कही। यहीं पर एक नया प्रश्न खड़ा होता है कि यदि दान में प्राप्त प्रत्येक वस्तु को बैंकिंग प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जाना था, तो वह निर्धारित चैनल से बाहर कैसे गई? क्या यह प्रक्रिया संबंधी चूक थी? क्या निगरानी में कमी थी? या फिर जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है? एसआईटी इन्हीं पहलुओं पर रिपोर्ट देगी।

मोदी के दूत पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्र पर भी सवाल

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के रुप में पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को यहां जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद पर दी गई थी। उन्हें पीएम का दूत माना जाता था, और हर बैठक और निरीक्षण में उनके निर्देश मोदी के वाक्य के रूप में स्वीकार होते थे। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय भी उनके निर्देश पर चलते थे। यूपी सरकार का पूरा शासन-प्रशासन उनके आगे-पीछे रहता था। ऐसे में इतनी बड़ी चोरी से नृपेंद्र मिश्र कैसे अंजान रहे, सवाल खड़ा करता है। अब वे कहते हैं कि चढ़ावे में हुई चोरी केवल साधारण चोरी नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास पर चोट है। मंदिर प्रबंधन व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता बता रहे हैं। लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित करने की बात कहते हैं।

कलंक लगने के बाद जिम्मेदारों की खुली आंख

ट्रस्ट महासचिव चंपत राय हो या पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र से लेकर ट्रस्ट के अन्य सदस्य और साधु-संतों का आंख कलंक लगने के बाद खुली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चंपत राय की ओर लिखे गए पत्र पर एसआईटी जांच के आदेश दिए गए। आरोपों से घिरे ट्रस्टियों ने सोचा होगा कि जांच में कुछ समय पूर्व के कुछ मामले खुलेंगे और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो जाएगी।

वे सपने में नहीं सोचे होंगे कि सेवानिवृत इंजीनियर दीनानाथ वर्मा सामने आकर शुरुआत से यानी छह साल पहले से ही लूट की पूरी कलंक कथा का स्क्रिप्ट सुनाएंगे। जिसमें ट्रस्टी अनिल मिश्रा और हनुमंत राव की मुख्य भूमिका के साथ संरक्षण देने वालों में "सब चोर हैं" कहने वाले चंपत राय स्वंय होंगे। साथ ही, विश्व हिंदू परिषद के दिनेश जी, मिलिंद परांडे और विनायक राव देशपांडे जैसे लोगों की चुप्पी सामने आएगी।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट – पदाधिकारी, सदस्य और जिम्मेदारियां
गठन : 5 फरवरी 2020

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट : कौन क्या देखता है?

महंत नृत्यगोपाल दास

पद : अध्यक्ष

ट्रस्ट के सर्वोच्च पदाधिकारी

महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों और बैठकों का नेतृत्व

चंपत राय

पद : महासचिव

ट्रस्ट का प्रशासनिक मुखिया

मंदिर प्रबंधन, कर्मचारियों और संचालन व्यवस्था की निगरानी

विभिन्न समितियों के बीच समन्वय

स्वामी गोविंद देव गिरि

पद : कोषाध्यक्ष

चढ़ावा, दान, निवेश और वित्तीय मामलों की निगरानी

वित्त समिति के अध्यक्ष

लेखा और ऑडिट व्यवस्था पर नजर

नृपेंद्र मिश्र (पूर्व आईएएस)

पद : अध्यक्ष, मंदिर निर्माण समिति

मंदिर निर्माण परियोजना की निगरानी

निर्माण एजेंसियों और तकनीकी संस्थाओं के साथ समन्वय
निर्माण गुणवत्ता और समयबद्धता की जिम्मेदारी

डॉ. अनिल कुमार मिश्रा

पद : ट्रस्टी

ट्रस्ट के प्रशासनिक और प्रबंधकीय कार्यों में सहभागिता

बैठकों एवं निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी

परमानंद जी महाराज

पद : ट्रस्टी

संत समाज का प्रतिनिधित्व
धार्मिक मामलों पर परामर्श

स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी

पद : ट्रस्टी

धार्मिक समिति से जुड़े विषयों में सहभागिता
ट्रस्ट की बैठकों और निर्णयों में भागीदारी

महंत दिनेंद्र दास

पद : ट्रस्टी

रामजन्मभूमि परिसर से जुड़े धार्मिक मामलों में सहभागिता
ट्रस्ट बैठकों में भागीदारी

शशांक मणि त्रिपाठी

पद : ट्रस्टी सदस्य

ट्रस्ट की निर्णय प्रक्रिया में सहभागिता
केंद्र सरकार के नामित प्रतिनिधि

ज्ञानेश कुमार (आईएएस)

केंद्र सरकार और ट्रस्ट के बीच समन्वय

उत्तर प्रदेश सरकार के नामित प्रतिनिधि

अवनीश कुमार अवस्थी (आईएएस)

राज्य सरकार और ट्रस्ट के बीच समन्वय
जिलाधिकारी, अयोध्या

पदेन सदस्य
स्थानीय प्रशासनिक समन्वय

सुरक्षा, भूमि और प्रशासनिक विषयों की निगरानी
ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख प्रबंधन पद

गोपाल राव

निर्माण एवं प्रबंधन प्रभारी

मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और प्रबंधन कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां
जिन सदस्यों का निधन हो चुका है

कामेश्वर चौपाल

विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र

स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती

के. परासरन

मुख्यमंत्री को सौंपी जा सकती है रिपोर्ट

सूत्रों के अनुसार लखनऊ मंडलायुक्त और एसआईटी अध्यक्ष विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में जांच अंतिम चरण में पहुंच रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को योग दिवस पर झांसी से लोटने के बाद रविवार शाम या सोमवार को सुबह सौंपी जाएगी। जांच रिपोर्ट में जवाबदेही तय होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनियमितता केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित थी या फिर व्यवस्था संबंधी बड़ी चूक का परिणाम थी।

संबंधित समाचार