राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण : ट्रस्ट ने 24 करोड़ में खरीदी सरकारी जमीन! PM मोदी के पास पहुंचा मामला
एसआईटी जांच के बीच एक-एक कर सामने आ रहे कोष दुरुपयोग के मामले
राजेंद्र कुमार पांडेय/अयोध्या,अमृत विचार : एसआईटी (विशेष जांच दल) की जांच के बीच एक-एक कर श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोष के दुरुपयोग के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला अवैध बैनामे के जरिए सरकारी (नजूल) की भूमि की खरीद से जुड़ा है। सरकारी जमीन की खरीद के नाम पर ट्रस्ट ने 23.61 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। अब यह मामला प्रधानमंत्री के पास पहुंच गया है। इसकी जांच होना भी लगभग तय है।
मामला अयोध्या में भूमि गाटा संख्या 247 रकबा.645 हेक्टेयर स्थित कोट राम चंदर तहसील सदर का है। पता चला है कि इस पर दर्ज खेवटदार मुरलीदास अयोध्या के गलत ढंग से इंद्राज को दुरुस्त करने के लिए यूपी भू राजस्व अधिनियम 2006 की धारा 33/39 के तहत कागजात दुरुस्ती का वाद संख्या 3174/2023 कंप्यूटरीकृत वाद संख्या टी-202304230103174 उप जिलाधिकारी सदर के न्यायालय पर दाखिल किया गया।
एसडीएम न्यायालय ने दो जून 2023 को गलत ढंग से दर्ज मुरलीदास का नाम खारिज करके आला खेवटदार सरकार बहादुर नजूल के नाम दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया। जमीन सरकार के पक्ष में पुष्ट हो गई। दो जून 2023 के इस आदेश के खिलाफ मुरलीदास ने एक निगरानी वाद संख्या रेवेन्यू/1842/2023/अयोध्या कंप्यूरीकृत वाद संख्या आर 20230423001842 न्यायालय राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ के समक्ष दाखिल किया।
इस निगरानी वाद की सुनवाई करते हुए न्यायालय श्री राम सिंहासन प्रेम सदस्य राजस्व परिषद यूपी ने एक दिसंबर 2023 को ग्राह्यता के स्तर पर ही इस निगरानी को निरस्त कर दिया। इससे एसडीएम का आदेश बहाल रहा, लेकिन इसके खिलाफ न तो रिट दाखिल की गई न ही अपील और निगरानी दाखिल की गई। इसलिए राजस्व न्यायालय का आदेश अंतिम हो चुका है और भूमि नजूल सरकार (सरकारी) में निहित हो गई।
खास बात यह है कि इन आदेशों के प्रभावी रहने के बावजूद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसी जमीन को 23.61 करोड़ रुपये में बैनामा करा लिया। यह अनाधिकार और फर्जी बैनामा दो अप्रैल 2024 को क्रमांक 4207/2024 को कराया गया, जबकि इस जमीन का बैनामा करने का कोई अधिकार विक्रेता को नहीं था। जमीन बैनामा कराने के पहले इसकी पड़ताल भी नहीं कराई गई, जबकि जिलाधिकारी अयोध्या भी ट्रस्ट के मनोनीत सदस्य होते हैं। इस नए मामले की प्रधानमंत्री से शिकायत जिले के प्रवीण दूबे ने की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि महासचिव ने विक्रेता के साथ दुरभिसंधि करके फर्जी अनाधिकार बैनामा के माध्यम से ट्रस्ट के कोष का व्यक्तिगत हितों में इस्तेमाल करने की साजिश की।ट्रस्ट के आर्थिक हितों को भारी पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। प्रधानमंत्री से मांग की कि दुरुपयोग हुए कोष के धन 23 करोड़ 61 लाख की वसूली अवैधानिक बैनामे में शामिल व्यक्तियों से की जाए।
