ज्योतिष शास्त्रोक्त विज्ञान

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Published By Anjali Singh
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सनातन काल से ही मनुष्य को अपने भविष्य को पूर्व में ही जान लेने की इच्छा रही है। व्यक्ति किसी भी स्तर का हो कितना ही ज्ञानी अथवा पढ़ा लिखा हो डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस हो किसी भी धर्म का हो, जब उसे पता लगता है कि सामने बैठा व्यक्ति ज्योतिष का जानकार है। वह अपने भविष्य जानने की जिज्ञासा कर बैठता है। अथवा अपना हाथ आगे बढ़ा कर पूछता है कि मेरे बारे में कुछ बताइए। कुछ लोग ज्योतिष में अविश्वास भी करते हैं। विचारणीय विषय यह है कि यदि ज्योतिष में कुछ सत्यता नहीं होती, तो इस विद्या का इतना प्रसार नहीं होता। आज कोई गांव, नगर ऐसा नहीं होगा जहां थोड़ा बहुत ज्योतिष जानने वाला न हो। जन्मपत्री बनाने वाले पंडित जी तो हर मंदिर में मिल जाएंगे। प्रत्यक्ष देखने में आता है कि ज्योतिष का प्रभाव बढ़ रहा है।

हर घर के कंप्यूटर में कुंडली बनाने वाला सॉफ्टवेयर होता ही है, जो कुंडली बनाने व देखने में सक्षम हैं, लोगों की रूचि इस विद्या के अध्ययन में बढ़ रही है। विदेशों में भी इसका प्रसार खूब हो रहा है। अब तो विद्यालयों में भी इस विद्या को पढ़ाया जा रहा है, जिस प्रकार ब्रह्मांड के एक भाग में पृथ्वी और तीन भाग में जल है, उसी प्रकार हमारा शरीर भी एक सूक्ष्म ब्रह्मांड है और इसमें भी एक भाग में मांस एवं तीन भाग में जल है।

जिस प्रकार ब्रह्मांड में सारे ग्रह विचरण करते हैं, उसी प्रकार इन ग्रहों का अंश हमारे षरीर के विभिन्न भागों में विचरण करता है और ब्रह्मांड के ग्रहों से प्रभावित होता है। हमारे शरीर में ग्रहों की स्थिति, उसका आकार हमारे जन्म के समय ही तय हो जाता है और वही जन्मकुंडली में अंश के साथ में प्रतिपादित होता है। ग्रहों के साथ-साथ शरीर में नक्षत्रों का भी स्थान होता है और समय-समय पर जीवनभर ब्रह्मांड के नक्षत्रों से प्रभावित होता है।

इसी प्रकार राशियों का भी गुण-धर्म होता है। प्राणियों में रोग भी इन्हीं ग्रहों के कारण होते हैं और इन्हीं से उपचार भी संभव है। सभी ग्रह विभिन्न राशियों में विचरण करते रहते हैं और समय-समय पर हमारे अंदर स्थित ग्रहों को प्रभावित करते रहते हैं, जिससे जीवन में उतार चढ़ाव आते है। ज्योतिष शास्त्र एक वैज्ञानिक तथ्य है और उन्हें झूठलाया नहीं जा सकता। ज्योतिष के दो भाग होते हैं, एक गणित, दूसरा फलित।

विविध राशियां भी प्रभाव डालती हैं और इन राशियों का हमारे शरीर पर प्रभाव पड़ता है। इस विद्या को प्राचीन समय में ऋ षियों मुनियों ने उच्चतम स्तर तक और आज आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से और उन्हें झुठलाया नहीं जा सकता। ज्योतिष का यह भाग है एक प्रकार दूसरा फलित।

गणित पूर्णत्या एक सिद्ध विज्ञान है, जिसे सनातन काल से भारत जानता है और इसी के बल पर हजारों वर्ष पहले के और बाद के ग्रह नक्षत्रों की स्थिति को बताया जा सकता है, जो कि ज्योतिष का आधार है और जो पुरातन ग्रंथों में वर्णित है। ज्योतिष सीखने से पहले गणित ही सिखाया जाता था। आजकल तो ज्योतिषियों को इसकी भी जरूरत नहीं पड़ती, कंप्यूटर ने उनका यह काम बहुत आसान कर दिया है। बटन दबाते ही कोई भी कुंडली प्राप्त की जा सकती है। इसकी गणित में दोष की संभावनाएं बहुत कम ही देखी गई है।

अब बात करते हैं फलित की, जिस प्रकार कोई मात्र डॉक्टर की डिग्री लेकर इलाज नहीं कर सकता, उसी प्रकार कोई व्यक्ति मात्र कुंडली बनाकर फलादेश नहीं बता सकता है। जिस प्रकार डॉक्टर व इंजीनियर को अपना कार्य करने के लिए अनुभव की आवश्यकता है। उसी प्रकार फलित बताने के लिए भी ज्योतिषी को अनुभव, गुरु एवं ईष्ट की आवश्यकता होती है।

कंप्यूटर द्वारा बताए गए फलित को विश्वसनीय नहीं माना जा सकता है, फलित ज्योतिष में ग्रहों का फल बताने के लिए ग्रह स्पष्ट, भाव ग्रहों की स्थिति आदि जानकर फल बताया जाता है। इसके अतिरिक्त गुण-धर्म, दृष्टि आदि अनेक बातों को भी ध्यान में रखा जाता है। ग्रहों की स्थिति आदि से बनने वाले विभिन्न योगों पर ध्यान देकर, देश-काल अवस्था का ध्यान रखते हुए फल बताना चाहिए।

जिस प्रकार कभी किसी डॉक्टर से इलाज कराने पर लाभ नहीं होता, उसी प्रकार फलादेश भी कई बार साफ नहीं निकलते हैं। डॉक्टर के इलाज से लाभ न होने पर, जिस प्रकार विज्ञान गलत नहीं होता, उसी प्रकार फलादेश सत्य न होने पर ज्योतिष शास्त्र को गलत बता देना ठीक नहीं है। इसका कारण ज्योतिषी ज्ञान और अनुभव अलग फल परिस्थितियों एवं ग्रहों का पूर्ण विचार का अभाव भी होता है। ज्योतिष ज्ञान केवल अनुभव व ईष्ट सिद्धि से ही बढ़ता है।
भाग्य उसी का साथ देता है, जो पुरुषार्थ करता है

ज्योतिष शास्त्र केवल संकेत मात्र है। अब यह भविष्य वक्ता के अनुभव पर निर्भर करता है कि देश, काल, अवस्था के अनुसार वह संकेतों से कैसा फलादेश कहता है। ज्योतिष यह तो बता सकता है कि अमुक प्राणी शिक्षा प्राप्त करेगा या उच्च शिक्षा प्राप्त करेगा, परंतु यह नहीं बता सकता कि बीए पास करेगा या एमए। हां यह संकेत अवश्य मिल जाएगा कि तकनीकी ज्ञान प्राप्त करेगा या अन्य यह ज्योतिषी को अपनी बुद्धि से विचारना पड़ता है कि असल बात क्या हो सकती है? अगर धुआं हो, तो क्या यह अग्नि है अथवा भाप या कोहरा। सूक्ष्म अंतर्ज्ञान एवं दृष्टि ही किसी ज्योतिषी को सफल भविष्य वक्ता बना सकती है। ज्योतिषी को यह सूक्ष्म अंतर्ज्ञान एकाग्र-चिंतन एवं शांतिपूर्वक संकेतों पर मनन करने से प्राप्त होता है। इसके लिए ज्ञान, धर्मनिष्ठा एवं ईश्वर में पूर्ण विश्वास होना जरूरी होता है, जो इच्छा शक्ति को प्रबल बनाता है और निश्चय पूर्वक विचारने की एवं फलित कहने की शक्ति प्रदान करता है। यह शंका भ्रमित करने वाली एवं निर्मूल है कि जब ऐसा फल होना ही है, तो क्यों कोशिश की जाए? ध्यान रहे कि बिना पुरुषार्थ किए देव भी फल नहीं देते हैं। पूर्व जन्म में किए गए कार्यों को देव/भाग्य कहा जाता है। इस जन्म में किए गए कार्यों को पुरुषार्थ। शरीर रूपी गाड़ी को चलाने के लिए देव एवं पुरुषार्थ दो पहिए हैं। भाग्य उसी का साथ देता है, जो पुरुषार्थ करता है।

नाकारा का भाग्य भी रुक जाता है। आपके पूर्व संचित कर्म बैंक में जमा राशि की तरह हैं, जिन्हें आप पुरुषार्थ के द्वारा खर्च कर सकते हैं, जो भी कर्म आपने पूर्व जन्म में किए हैं, उनका फल कर्मानुसार इस जन्म में प्राप्त होता है। यह फल ग्रहों की स्थिति विचारने से दृष्टि गोचर होता है। जब कुंडली में बुरे समय का ज्ञान हो, तो समझ लो कि पूर्व जन्म के बुरे कर्म उदय हो रहे हैं। इसका निवारण जप और धैर्य द्वारा किया जा सकता है और जब कुंडली में शुभ समय का ज्ञान हो, तो शुभ कार्य करने के कार्य में सफलता प्राप्त होती है। विदेशों में भविष्य वक्ताओं की बहुत पूछ है, क्योंकि ज्योतिषियों ने अमेरिका में सन् 61 में 12 भविष्यवाणियां की, जिनमें से कई सत्य साबित हो चुकी हैं। जॉन कैनेडी के बारे में 6 मास पूर्व ही बता दिया गया था कि वह राष्ट्रपति बनेंगे। इंग्लैंड की लेडी गाडमैन की भविष्यवाणियां जग प्रसिद्ध हैं और उनके नाम पर वहां ज्योतिष का रिसर्च इंस्टीटयूट भी है। आजकल तो यह धनोपार्जन का भी एक अच्छा साधन बन गया है।

अशोक सूरी, आध्यात्मिक लेखक