Lucknow Fire Tragedy : अलीगंज अग्निकांड के बाद योगी का बुलडोजर मोड, अवैध इमारतों की खुलीं फाइलें... 34 कोचिंग और तीन होटल सील

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Published By Deepak Mishra
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मुख्यमंत्री का अवैध निर्माण, फायर एनओसी और प्रशासनिक जवाबदेही पर सख्त रूख

धीरेंद्र सिंह, लखनऊ, अमृत विचार: अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत ने राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस हादसे ने सिर्फ एक इमारत में लगी आग की कहानी नहीं लिखी, बल्कि अवैध निर्माणों, फर्जी अनुमतियों, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और विभागीय लापरवाही की पूरी परत खोल दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना के कुछ घंटों के भीतर ही अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ लौटने, एसआईटी गठन करने के बाद मंगलवार को राज्य के सभी नगरीय इलाकों में छापेमारी और कार्रवाई के निर्देश दिए। दोपहर तक 20 जिलों में 34 कोचिंग और तीन होटल सील कर दिए गए। सीएम ने जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, डीजीपी समेत तमाम आला अधिकारियों और एलडीए उपाध्यक्ष को भी तलब किया है।

मुख्यमंत्री का साफ संदेश है कि इस बार मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री ने राजधानी के सातों जोन में एक जनवरी 2026 से अब तक अवैध निर्माणों के खिलाफ हुई कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा है। किस भवन को नोटिस दिया गया, कितनों को सील किया गया, किन पर ध्वस्तीकरण हुआ और किन अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की, इसकी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में तलब की गई है। इसी तरह का निर्देश सभी नगर निगमों में देते हुए मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में इसे योगी सरकार के "बुलडोजर मोड-2" की शुरुआत माना जा रहा है।

अलीगंज कोचिंग अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का आईना बनकर सामने आया है। 15 छात्रों की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर दिया है। अब नजरें मुख्यमंत्री द्वारा मांगी गई रिपोर्ट, एसआईटी की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है। सवाल उन हजारों इमारतों का है, जहां हर दिन लाखों छात्र, कर्मचारी और आम नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर प्रवेश करते हैं। अगर इस बार जवाबदेही तय हुई, तो अलीगंज की त्रासदी प्रदेश में सुरक्षित शहरी ढांचे की शुरुआत बन सकती है। अगर नहीं, तो यह भी सरकारी फाइलों में दर्ज एक और दर्दनाक अध्याय बनकर रह जाएगी।

हादसा जिसने झकझोर दिया पूरा प्रदेश

अलीगंज स्थित बहुमंजिला भवन में संचालित कोचिंग संस्थान में सोमवार को लगी आग ने कुछ ही मिनटों में 15 जिंदगियां निगल लीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि भवन में कोचिंग के अलावा अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी संचालित हो रही थीं। इमारत की उपयोगिता, स्वीकृत मानचित्र, अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन निकास को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धुआं इतनी तेजी से फैला कि छात्रों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। कई छात्र खिड़कियों और छत की ओर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घटना ने देश के सबसे बड़े प्रदेश की राजधानी में भवन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

मुख्यमंत्री का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद स्पष्ट कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव गृह और संबंधित विभागों को पूरी जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री यह जानना चाहते हैं कि क्या भवन के खिलाफ पहले कोई शिकायत हुई थी? क्या एलडीए ने कोई नोटिस जारी किया था? क्या फायर विभाग ने एनओसी दी थी? क्या भवन का उपयोग स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप था? क्या बिजली विभाग ने ओवरलोडिंग पर कोई आपत्ति दर्ज की थी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में कई अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।

सातों जोन की रिपोर्ट क्यों

मुख्यमंत्री ने सातों जोन की रिपोर्ट इसलिए मांगी है क्योंकि यह आशंका है कि राजधानी में ऐसे सैकड़ों भवन हैं, जहां आवासीय नक्शे पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। कोचिंग संस्थान, हॉस्टल, क्लीनिक, बेसमेंट में चल रहे कार्यालय, पीजी और छोटे होटल वर्षों से नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष हजारों अवैध निर्माणों को नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक ध्वस्तीकरण बहुत कम मामलों में होता है। यही कारण है कि अलीगंज हादसे के बाद सवाल सीधे प्रशासनिक जवाबदेही पर खड़े हो गए हैं।

पूरे प्रदेश में शुरू हुई कार्रवाई

लखनऊ हादसे के बाद सरकार ने प्रदेशव्यापी अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस, जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीमें कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों और होटलों का निरीक्षण कर रही हैं। अब तक कानपुर में 30 कोचिंग संस्थान सील किए गए हैं, जबकि वाराणसी में दो संस्थान बंद कराए गए हैं। नोएडा और मथुरा में एक-एक कोचिंग सील किए गए हैं। बरेली में दो होटल सील किए गए हैं। मथुरा में एक होटल पर कार्रवाई हुई है। कुल मिलाकर 34 कोचिंग संस्थान और तीन होटल सील किए जा चुके हैं।

प्रशासन का तीन बिंदुओं पर विशेष फोकस

  1. फायर एनओसी है या नहीं
  2. आपातकालीन निकास की व्यवस्था है या नहीं
  3. क्षमता से अधिक लोगों का संचालन तो नहीं हो रहा
विभागीय कार्रवाई से लेकर आपराधिक मुकदमा तक

सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है। टीम भवन के निर्माण से लेकर संचालन तक की पूरी पड़ताल करेगी। जांच के दायरे में शामिल होंगे भवन स्वीकृति, उपयोग परिवर्तन, फायर एनओसी, बिजली कनेक्शन, व्यापारिक लाइसेंस, विभागीय निरीक्षण और जिम्मेदार अधिकारी। सूत्रों का कहना है कि यदि लापरवाही साबित हुई तो कई अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई से लेकर आपराधिक मुकदमा तक दर्ज हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल : कौन देता है अवैध इमारतों को संरक्षण

लखनऊ में अवैध निर्माण कोई नई समस्या नहीं है। शहर के लगभग हर इलाके में आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। एलडीए नोटिस जारी करता है। नगर निगम टैक्स वसूलता है। फायर विभाग निरीक्षण करता है। बिजली विभाग व्यावसायिक कनेक्शन देता है। इसके बावजूद वर्षों तक कार्रवाई नहीं होती। यही वह व्यवस्था है, जिस पर अलीगंज हादसे ने सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि भवन अवैध था तो चलता कैसे रहा? यदि वैध था तो सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी? यदि नोटिस दिए गए थे तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

 विपक्ष के निशाने पर सरकार

हादसे के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि जिस भवन में हादसा हुआ, उसके खिलाफ पहले भी कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। उन्होंने एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार हर बड़े मामले में जांच बैठाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है। ऐसा ही अयोध्या में कर रही है।

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