Ram Mandir Donation Case: दान-पात्रों की गिनती के लिए था सख्त प्रोटोकॉल, नियमों की अनदेखी से खुला हेराफेरी का रास्ता!

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Published By Muskan Dixit
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच फरवरी 2025 में दान-पात्रों की गिनती को पारदर्शी बनाने के लिए विस्तृत कार्यप्रणाली तय की गई थी। सूत्रों के अनुसार, कई प्रावधानों का नियमित पालन नहीं होने से कथित अनियमितताओं की आशंका बढ़ी, जिसे अब जांच के बाद सख्ती से लागू किया जा रहा है।

अयोध्याः राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच दान-पात्रों से निकलने वाली राशि की गणना व्यवस्था को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच फरवरी 2025 में एक विस्तृत समझौता (एमओयू) हुआ था, जिसमें दानराशि की गिनती और जमा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की गई थीं।

बताया जा रहा है कि समझौते में तय कई दिशा-निर्देशों का नियमित और प्रभावी पालन नहीं हो सका, जिससे कथित गड़बड़ियों की आशंका पैदा हुई।

दान-पात्र खोलने से लेकर गिनती तक तय थी पूरी प्रक्रिया

एमओयू के अनुसार दान-पात्रों को केवल ट्रस्ट और एसबीआई के नामित अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में खोला जाना था। गिनती कक्ष का संचालन भी दोनों पक्षों की संयुक्त निगरानी में होना था।

गणना में लगे कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड निर्धारित किया गया था और पूरी प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किया जाना था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इन व्यवस्थाओं का हर स्तर पर प्रभावी पालन नहीं हुआ।

कर्मचारियों के रोटेशन और जांच पर भी थे स्पष्ट निर्देश

समझौते में बैंक अधिकारियों के मासिक रोटेशन का प्रावधान था ताकि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति संवेदनशील जिम्मेदारी पर न रहे।

इसके अलावा गिनती कक्ष में आने-जाने वाले कर्मचारियों की नियमित और रैंडम तलाशी लेने के निर्देश भी दिए गए थे। प्रत्येक दान-पात्र की राशि अलग-अलग दर्ज करने और क्रमवार गिनती सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी तय थी।

सूत्रों के अनुसार, इन व्यवस्थाओं का भी पूरी तरह अनुपालन नहीं किया गया।

रिकॉर्ड सत्यापन और दैनिक रिपोर्टिंग पर भी उठे सवाल

एमओयू में नकद जमा पर्चियों, रजिस्टरों और दैनिक रिपोर्ट के सत्यापन की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित थी। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी जांच के दौरान रिकॉर्ड के रखरखाव और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।

नियमित समीक्षा होती तो पहले सामने आ सकती थीं गड़बड़ियां

समझौते में यह भी प्रावधान था कि अनावश्यक नकदी जमा न रहने पाए और इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाए। सूत्रों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती, तो कथित अनियमितताओं का पता पहले चल सकता था।

पूरी निगरानी की जिम्मेदारी ट्रस्ट पर थी, लेकिन जांच में निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठे हैं।

मामला सामने आने के बाद बदली पूरी व्यवस्था

चढ़ावा चोरी के मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद दान-पात्रों की गिनती की व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं।

वर्तमान में दानराशि की गणना के लिए 39 कर्मचारी तैनात हैं। पहले यह संख्या 45 थी, जबकि शुरुआती दौर में केवल 22 कर्मचारी इस कार्य में लगे थे। चढ़ावे की राशि बढ़ने के साथ कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई थी।

अब कर्मचारियों की नियमित तलाशी ली जा रही है, ड्रेस कोड लागू किया गया है, कंट्रोल रूम से अलग निगरानी टीम तैनात की गई है और पूरी प्रक्रिया की प्रतिदिन वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है।

एमओयू के अनुसार एसबीआई की प्रमुख जिम्मेदारियां

- दान-पात्रों से प्राप्त राशि को निर्धारित समय पर ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराना।
- निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी गणना प्रक्रिया का संचालन करना।
- नोट गिनने वाली मशीनों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाना।
- अनावश्यक नकदी जमा न रहने देने के लिए नियमित समीक्षा करना।
- गणना में लगे कर्मचारियों की नियुक्ति और निगरानी करना।
- बैंक अधिकारियों का मासिक रोटेशन सुनिश्चित करना।

ट्रस्ट की प्रमुख जिम्मेदारियां

- पूरी गणना प्रक्रिया की निगरानी कर पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखना।
- नकद जमा पर्चियों, चालानों और संबंधित अभिलेखों का सत्यापन करना।
- कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधाएं और उपयुक्त कार्य वातावरण उपलब्ध कराना।

संयुक्त जिम्मेदारियां

- दान-पात्रों को प्रतिदिन ट्रस्ट और एसबीआई के नामित अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में खोलना।
- गिनती कक्ष का संयुक्त रूप से संचालन और पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित करना।

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