Bareilly News : सूख रही धरती की कोख, सात इलाकों मे तेजी से गिरा वाटर लेवल
जांच रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, स्टेडियम रोड और कांधरपुर में तेजी से नीचे गया वाटर लेवल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करने और जल संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन हुआ अलर्ट
बरेली, अमृत विचार। भूजल के अंधाधुंध दोहन का खतरनाक असर बरेली के वाटर लेवल पर साफ दिखाई देने लगा है। भूगर्भ जल विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पहले से ही अतिदोहित श्रेणी में दर्ज शहर के सात प्रमुख इलाकों की जमीन में पानी बेहद तेजी से खत्म हो रहा है। इस गंभीर संकट की जद में स्पोर्ट्स स्टेडियम रोड और कांधरपुर क्षेत्र सबसे ऊपर हैं। यहां स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है।
दरअसल, भूगर्भ विभाग की ओर से शहर के कुल 33 अलग-अलग इलाकों में हाइड्रोग्राफ स्टेशन बनाकर औसत जलस्तर की गहराई से जांच की गई थी। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों से तुलना करने पर जो रिपोर्ट सामने आई, उसने प्रशासनिक अधिकारियों की भी नींद उड़ा दी है। शहर के वीआईपी माने जाने वाले स्पोर्ट्स स्टेडियम क्षेत्र में औसत जलस्तर गिरकर 9.05 मीटर पर पहुंच गया है, जहां पानी में 2.70 मीटर की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। इसी तरह कांधरपुर में भूजल स्तर 2.83 मीटर की गहराई पर है, जहां पानी का स्तर 1.17 मीटर नीचे खिसक चुका है। इसके अलावा कर्मचारी बीमा निगम, सीबीगंज में .20 मीटर और हरुनगला जैसे घने रिहायशी इलाके में .38 मीटर जलस्तर घट गया है। सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट सौरभ शाह ने बताया कि जिन सात इलाकों में जलस्तर चिंताजनक रूप से घटा है, वहां उत्तर प्रदेश अटल भूजल योजना को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करने के साथ-साथ पीजोमीटर मापन, एक्यूफर पंप टेस्ट और बड़े पैमाने पर जन-जागरुकता अभियान चलाए जाएंगे, ताकि वाटर लेवल को सुधारा जा सके।
शहर के इन क्षेत्रों में बढ़ा जलस्तर
जहां एक ओर शहर के सात इलाकों में पानी की कमी का संकट गहरा रहा है, वहीं सुकून देने वाली खबर भी है। भूगर्भ विभाग की इसी रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कई हिस्सों में जलस्तर में उछाल और सुधार दर्ज किया गया है। सबसे बेहतरीन सुधार आईवीआरआई क्षेत्र में देखा गया है, जहां जलस्तर में 5.72 मीटर की रिकॉर्ड बढ़त हुई है। इसके अलावा आईटीआई सीबीगंज में 2.90 मीटर, स्वाले नगर में 2.68 मीटर, महिला जीटीआई में 2.69 मीटर, बुखारा में 2.31 मीटर और कटघर में 2.20 मीटर तक वाटर लेवल सुधरा है। सुभाषनगर, राजेंद्र नगर, पीसी आजाद और कमिश्नर कार्यालय परिसर के भूजल स्तर में भी आंशिक सुधार दर्ज किया गया है, जो जल संचयन के लिहाज से एक अच्छा संकेत है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर रहेगा जोर
गिरते भूजल स्तर को देखते हुए प्रशासन वर्षा जल संचयन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को सक्रिय करने की योजना बनाई जा रही है। सीडीओ देवयानी का कहना है कि बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाकर ही भूजल स्तर में सुधार संभव है। इसके लिए लोगों को भी अपने घरों और भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली लगाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
