Balrampur News : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साधा भाजपा पर निशाना, बोले- राम मंदिर ट्रस्ट में 'कलाकारी' गौ-रक्षा के नाम पर सिर्फ ढोंग

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Published By Anjali Singh
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बलरामपुर, अमृत विचार। ज्योतिष्पीठ एवं द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को बलरामपुर में आयोजित 'गौ-रक्षा-धर्म रक्षा' यात्रा कार्यक्रम में केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के नाम पर जनता की आस्था के साथ 'कलाकारी' की गई है और गौ-रक्षा के मुद्दे पर सिर्फ राजनीति हो रही है।

बलरामपुर में संतों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच शंकराचार्य ने कहा कि करोड़ों सनातनियों की वर्षों की तपस्या से अयोध्या में राम मंदिर बना। लेकिन मंदिर निर्माण के बाद बने ट्रस्ट में पारदर्शिता का अभाव है। चंदा और दान के पैसे का हिसाब जनता के सामने नहीं रखा जा रहा। उन्होंने इसे 'कलाकारी' बताते हुए कहा कि जिस भावना से मंदिर बना था, उस भावना का सम्मान ट्रस्ट को करना चाहिए।

गौ-रक्षा पर सरकार को घेरा

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भाजपा सत्ता में आने से पहले गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने और गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात करती थी। 10 साल से अधिक समय बीत गया, लेकिन अब तक न तो गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा मिला और न ही गौहत्या रुकी। उन्होंने कहा कि आज भी गौकशी की घटनाएं हो रही हैं, गौशालाओं में गायें भूख और बीमारी से मर रही हैं। सरकार सिर्फ गौ-रक्षा के नाम पर वोट मांग रही है, धरातल पर कुछ नहीं हो रहा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव है। तब जनता गौ-रक्षा और राम मंदिर के नाम पर हुए वादों का हिसाब मांगेगी। संत समाज अब इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा।

देशव्यापी यात्रा से जगाएंगे जनचेतना

शंकराचार्य ने घोषणा की कि गौ-रक्षा और धर्म की रक्षा के लिए देशभर में संत समाज यात्रा निकालेगा। इस यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा कि गौमाता हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। जब तक गौहत्या बंद नहीं होती और गाय को संवैधानिक दर्जा नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर सत्ता पाना आसान है, लेकिन धर्म निभाना कठिन है।

सरकारों को चाहिए कि वे सनातन मूल्यों को केवल भाषणों तक सीमित न रखें, बल्कि कानून और नीतियों में उतारें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत, महंत और स्थानीय लोग मौजूद रहे। मंच से सभी वक्ताओं ने एक स्वर में गौ-रक्षा कानून बनाने और राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग की। शंकराचार्य के उद्बोधन के बाद श्रद्धालुओं ने गौमाता की जय और सनातन धर्म की जय के नारे लगाए।

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