Explained: स्मार्टफोन से लेकर EV तक... Made in India चिप्स का दौर शुरू! जानिए क्या है इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और इसके फायदे

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Published By Muskan Dixit
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मोदी सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को दी मंजूरी, 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव के साथ चिप निर्माण, डिजाइनिंग और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत करने पर रहेगा फोकस।

डिजिटल डेस्कः भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही घरेलू मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (MPMS) को भी अपग्रेड करने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी।

क्या है इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0?

केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत की थी। पहले चरण में मुख्य रूप से चिप निर्माण और पैकेजिंग यूनिट्स को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था। अब दूसरे चरण यानी ISM 2.0 में सरकार का लक्ष्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाना भी होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस मिशन के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस योजना की घोषणा पहले ही केंद्रीय बजट में की जा चुकी थी।

मिशन का फोकस

क्षेत्र फोकस
Semiconductor Equipment चिप निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण
Semiconductor Materials विशेष मटेरियल और सप्लाई चेन विकास
Chip Design फुल-स्टैक डिजाइनिंग क्षमता विकसित करना
Advanced Manufacturing अगली पीढ़ी की तकनीकों पर निवेश
Ecosystem Development घरेलू उद्योग और स्टार्टअप्स को बढ़ावा

फुल-स्टैक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर रहेगा जोर

ISM 2.0 के तहत सरकार भारत में फुल-स्टैक सेमीकंडक्टर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी विकसित करने पर फोकस करेगी। इसके अंतर्गत चिप डिजाइन, फेब्रिकेशन, एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भागीदारी मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

2030 तक 100-115 बिलियन डॉलर का बाजार बनने का अनुमान

सरकार का अनुमान है कि इस मिशन के जरिए वर्ष 2030 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 100 से 115 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। पहले चरण के दौरान यह बाजार लगभग 45 से 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। ऐसे में अगले पांच वर्षों में इसके लगभग दोगुना होने की संभावना जताई जा रही है।

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स्टार्टअप और हाई-टेक इंडस्ट्री को मिलेगा लाभ

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का सबसे बड़ा लाभ चिप डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर डिवाइस, ऑटोमेशन और हाई-टेक टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स को मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।

शेयर बाजार में Moschip, SPEL Semiconductor, BEL, Kaynes Tech, CG Power, Dixon Tech जैसी कई कंपनियां भी हैं, जिनको सरकार के इस फैसले से फायदा होगा।

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में सात अहम फैसले लिए गए। इनमें तीसरा, चौथा और पांचवां निर्णय सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से संबंधित है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है।

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कई राज्यों में स्थापित हो रहे नए सेमीकंडक्टर चिप प्लांट

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत देश के गुजरात, असम, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में नए सेमीकंडक्टर चिप प्लांट विकसित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य भारत को वैश्विक चिप निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मजबूत करना है।

इन परियोजनाओं में सबसे प्रमुख गुजरात के धोलेरा में बन रहा देश का पहला कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (फैब) प्लांट है। यह परियोजना टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पीएसएमसी (PSMC) की साझेदारी में विकसित की जा रही है।

करीब 91,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस अत्याधुनिक प्लांट में हर महीने लगभग 50,000 वेफर के उत्पादन की क्षमता होगी। यह परियोजना भारत की चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, एआई और हाई-टेक उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

भारत की चिप क्रांति की मजबूत नींव

केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 1.0 की शुरुआत की थी। इस पहल के तहत अब तक 12 सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।

इन परियोजनाओं में माइक्रोन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, केन्स सेमीकॉन (Kaynes Semicon) और सीजी सेमी (CG Semi) जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कुछ इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का अत्याधुनिक चिप फैब्रिकेशन (फैब) प्लांट निर्माणाधीन है।

सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने देश में चिप निर्माण के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार किया, जिस पर अब सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने, डिजाइन, अनुसंधान और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

युवाओं को मिलेगी एडवांस सेमीकंडक्टर ट्रेनिंग, रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के साथ बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत होगी। इसी दिशा में देश के 315 विश्वविद्यालयों में करीब 68,000 छात्र आधुनिक चिप डिजाइन की ट्रेनिंग प्राप्त कर चुके हैं। अब सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत इंजीनियरिंग छात्रों को फैब (Fab), क्लीन रूम तकनीक और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी उन्नत प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे उद्योग की जरूरतों के अनुरूप सीधे रोजगार के लिए तैयार हो सकें।

सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 की उपलब्धियां

भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पहले चरण की सफलता ने दूसरे चरण की मजबूत नींव तैयार की है।

1- अब तक 12 बड़े सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है।

2- इन परियोजनाओं में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है।

3- इनमें 1 सिलिकॉन फैब, 1 सिलिकॉन कार्बाइड फैब, 1 गैलियम नाइट्राइड (GaN) माइक्रो LED डिस्प्ले फैब और 9 चिप पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं।

4- Micron, Kaynes Semicon और CG Semi जैसी कंपनियां भारत में व्यावसायिक स्तर पर चिप उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, जबकि एक और बड़ी यूनिट इसी वर्ष शुरू होने की तैयारी में है।

5- सरकार ने 24 स्टार्टअप्स और MSMEs के चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके अलावा 105 स्टार्टअप्स को चिप डिजाइन के लिए उपयोग होने वाले अत्याधुनिक और महंगे सॉफ्टवेयर निःशुल्क उपलब्ध कराए गए हैं।

आम लोगों को क्या होगा फायदा?

1. इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद हो सकते हैं सस्ते

देश में चिप निर्माण बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे आयात शुल्क और परिवहन लागत घटेगी, जिसका असर भविष्य में स्मार्टफोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है।

2. रोजगार के बड़े अवसर

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में होने वाले बड़े निवेश से नई फैक्ट्रियां स्थापित होंगी। इससे इंजीनियर, तकनीशियन, मशीन ऑपरेटर, लॉजिस्टिक्स, रिसर्च और मार्केटिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में लाखों रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

3. राष्ट्रीय सुरक्षा होगी मजबूत

आधुनिक रक्षा उपकरणों, मिसाइलों, रडार और फाइटर जेट्स में सेमीकंडक्टर चिप्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्वदेशी चिप निर्माण बढ़ने से विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और संवेदनशील रक्षा प्रणालियों व डेटा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

 

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