Pilibhit Medical College Murder : सरकारी मेडिकल कॉलेज सिर्फ 'रेफरल सेंटर'? छात्रा की मौत ने खोली पोल
सरकारी मेडिकल कॉलेज से इलाज के लिए छात्रा को भेजा निजी अस्पताल
पीलीभीत, अमृत विचार : मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल परिसर में छात्रा पर हुए हमले के बाद एक और बड़ा सवाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है। करोड़ों रुपये की लागत से संचालित स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में गंभीर रूप से घायल छात्रा को प्राथमिक उपचार देने के बाद बरेली के निजी एसआरएमएस अस्पताल रेफर करना पड़ा। इससे मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन इलाज की क्षमता पर चर्चा तेज हो गई है।
चिकित्सकों के अनुसार, हमले में छात्रा की गर्दन की मुख्य रक्त वाहिकाएं कट गई थीं। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने तत्काल सेंट्रल लाइन डालकर रक्त चढ़ाया, इंटुबेशन किया और हालत संभालने का प्रयास किया। आलम ये था कि एक भी एचओडी इमरजेंसी में दिखाई नहीं दिया। काफी देर बाद स्थिति अत्यंत गंभीर होने पर एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस से उसे बरेली भेजा गया।
एंबुलेंस के साथ दो सीनियर रेजिडेंट, तीन जूनियर रेजिडेंट, एक ओटी टेक्नीशियन, जीवनरक्षक दवाएं और ब्लड बैग भी भेजे गए, लेकिन उपचार के दौरान छात्रा की मौत हो गई। चिकित्सकों के अनुसार छात्रा को तत्काल वैस्कुलर (रक्त वाहिका) सर्जरी की आवश्यकता थी। मेडिकल कॉलेज में इस स्तर की सुपर स्पेशियलिटी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे बरेली के निजी एसआरएमएस अस्पताल रेफर करना पड़ा।
इससे फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जनपद में सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहा है तो गंभीर ट्रॉमा और वैस्कुलर सर्जरी जैसे मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों पर क्यों निर्भर होना पड़ता है। जबकि मेडिकल कॉलेज बनने का उद्देश्य जिले में ही गंभीर मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराना था, लेकिन जटिल मामलों में अभी भी रेफर की मजबूरी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्दन की रक्त वाहिकाओं में गंभीर चोट जैसे मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि उसी अस्पताल में आवश्यक विशेषज्ञ और ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध हो तो मरीज के बचने की संभावना बढ़ सकती थी।
ऐसे में यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं की आवश्यकता को भी उजागर करती है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप छात्रा को तत्काल जीवन रक्षक उपचार दिया गया और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता को देखते हुए उसे उच्च स्तरीय सुविधा वाले अस्पताल रेफर किया गया। बावजूद इसके, इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की जरूरत पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। घटनास्थल पर सीसीटीवी भी नहीं लगा है।
