युवा वैज्ञानिक की संदिग्ध मौत, होटल के रूम में मिला शव

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Published By Indrabhushan Dubey
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बैटरी चालित ट्रैक्टर बनाकर आया था सुर्खियों में

कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार: गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के इंजीनियर एवं ड्रोनमैन के नाम से मशहूर युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह (25) की मंगलवार संदिग्ध हालात में मौत हो गई। उनका शव विभूतिखंड स्थित नोवॉटेल होटल के रूम में बेड पर औंधे मुंह मिला। बेड पर ही उल्टी भी पड़ी थी। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी व फॉरेंसिक टीम पहुंची। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य संकलन किए। इंस्पेक्टर विभूतिखंड उपेंद्र सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई।

एसीपी विभूतिखंड सौम्या पांडेय ने बताया कि राहुल सिंह मूल रूप से महाराजगंज जनपद के सिसवा बाजार बीजापार इलाके के छपरा गांव के रहने वाले थे। राहुल गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में इंजीनियर व डिजाइन इनोवेटर एंड इंक्यूबेशन सेंटर में रिसर्च और पढ़ाई कर रहे थे। सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे राहुल नोवॉटेल होटल पहुंचे। यहां एक कमरे में रुके थे। मंगलवार सुबह उन्हें चेक आउट करना था। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर कर्मचारी ने कमरे का दरवाजा खटखटाया।

कोई जवाब न मिलने पर होटल प्रबंधन ने डॉयल-112 पर सूचना दी। जानकारी मिलते ही विभूतिखंड थाने के इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा। वीडियोग्राफी कर पुलिस अंदर पहुंची। अंदर कमरे में बेड पर औंधे मुंह राहुल मृत हालत में मिले। बेड पर ही उल्टी पड़ी थी। जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारी व फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। छानबीन के दौरान कमरे में रखी डायरी को पुलिस ने खंगाला। उसपर लिखे नंबरों से परिजन व एमएमएमयूटी में सूचना दी।

पुलिस ने राहुल को लोहिया अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एसीपी ने बताया कि आशंका है कि राहुल की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह साफ हो सकेगी। राहुल के परिवार में पिता संजय सिंह, मां रासमुनि देवी, एक भाई और बहन है। पिता किसान और मां गृहणी हैं।

16 साल की उम्र में ड्रोन बनाकर किया था कमाल
बताया जा रहा है कि राहुल बचपन से ही मेधावी और तकनीकि की खोज में माहिर थे। राहुल ने महज 16 साल की उम्र में ही कमाल कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने बाढ़ और भूस्खलन में फंसे लोगों की जान बचाने के लिए एक अत्याधुनिक ड्रोन मात्र 80 हजार रुपये में तैयार किया था। ड्रोन की बाजार की कीमत करीब आठ से नौ लाख रुपये थी। इसके बाद ड्रोन मैन के नाम से मशहूर हो गए थे।

तीन साल अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शन मारी थी बाजी
मेधावी राहुल ने गोरखपुर के दिव्यनगर एबीसी पब्लिक स्कूल से इंटर पास किया था। इसके बाद मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विवि के युवा इंजीनियर बने। राहुल ने तीन साल लगातार अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में अपने नवाचारों से पहले स्थान पर बाजी मारी। 13 साल की उम्र से इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में प्रतिभाग किया। वर्ष 2018 में रोटी मेकर, 2019 में बैटरी चालित इको-फ्रैंडली साइकिल और 2020 में वैश्विक महामारी के चलते ऑनलाइन हुए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बैट्री से चलने वाली इको फ्रेंडली ट्रैक्टर बनाकर तीन पुरस्कार हासिल किए। राहुल द्वारा बनाया गया ट्रैक्टर बिना डीजल-पेट्रोल के चलता है। इसकी बैटरी ट्रैक्टर चलने के दौरान खुद ही चार्ज होती रहती थी। उनके इस नवाचार को कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना गया था।

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