KGMU News: केजीएमयू छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पकाने पर रोक, बाहर से खाना मंगाने की रहेगी अनुमति

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) ने अपने सभी छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पकाने पर रोक लगा दी है। हालांकि, छात्र पहले की तरह बाहर से मांसाहारी भोजन मंगा सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल छात्रावास परिसर में मांसाहारी भोजन पकाने तक सीमित है।

यह निर्णय उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं केजीएमयू की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल द्वारा छात्रावासों में मांसाहारी भोजन बनाए जाने पर चिंता जताने के बाद लिया गया। राज्यपाल सोमवार को आयोजित केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल हुई थीं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें जानकारी मिली है कि विश्वविद्यालय के कुछ छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पकाया जा रहा है।

आधिकारिक मेस में पहले से नहीं बनता था नॉन-वेज

केजीएमयू प्रशासन के अनुसार, विश्वविद्यालय के किसी भी आधिकारिक छात्रावास भोजनालय में मांसाहारी भोजन या अंडा शामिल नहीं है। भोजनालयों की मेन्यू सूची पहले से तय होती है और उसमें केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता है।

प्रशासन ने अब यह भी तय किया है कि छात्रावासों और परिसर में निजी स्तर पर मांसाहारी भोजन पकाने की निगरानी की जाएगी और ऐसा करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, छात्रों के लिए बाहर से नॉन-वेज भोजन मंगाने पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

राज्यपाल की टिप्पणी के बाद बनी कार्यबल

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. कुमार शांतनु ने बताया कि कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने राज्यपाल द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा के लिए प्रतिकुलपति की अध्यक्षता में एक कार्यबल (टास्क फोर्स) का गठन किया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित सभी 18 आधिकारिक भोजनालयों में केवल शाकाहारी भोजन परोसा जाता है। वहीं, छात्र सहकारी व्यवस्था से संचालित कुछ निजी भोजनालयों में पहले मांसाहारी भोजन बनाया जाता था, लेकिन अब उन्हें भी ऐसा न करने के निर्देश दिए गए हैं।

फैकल्टी के भीतर भी अलग-अलग राय

विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने इस फैसले पर अलग राय व्यक्त की है। उनका कहना है कि एक चिकित्सा विश्वविद्यालय होने के नाते छात्रों की खान-पान संबंधी व्यक्तिगत पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि चिकित्सकीय दृष्टि से कई लोगों के लिए अंडा और अन्य प्रोटीन युक्त आहार उपयोगी होते हैं, इसलिए इस तरह के प्रतिबंध पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।

आरएमएलआईएमएस में भी हो सकती है समीक्षा

इससे पहले राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के दीक्षांत समारोह में भी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रावासों में सप्ताह में दो दिन मांसाहारी भोजन परोसे जाने पर सवाल उठाए थे। संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल वहां यह व्यवस्था जारी है, लेकिन राज्यपाल की टिप्पणी के बाद भोजन सूची की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

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