Barabanki News : बाराबंकी में देशी शराब ठेके पर बढ़ा विवाद, एसपी रेलवे ने दिया सुरक्षा का हवाला, तो आबकारी विभाग ने कहा- 6 करोड़ के राजस्व का सवाल

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Published By Deepak Mishra
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जिलाधिकारी बाराबंकी के फैसले पर टिकीं निगाहें

रेलवे स्टेशन के बाहर संचालित देशी शराब के ठेके को हटाने की मांग अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर विवाद का विषय बन गई है। जहां एसपी रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा, शराबियों के उत्पात और संभावित रेल दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए जिलाधिकारी से ठेका हटाने की सिफारिश की है, वहीं आबकारी विभाग ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए ठेके को यथावत बनाए रखने की पैरवी की है।

बाराबंकी, अमृत विचार। रेलवे स्टेशन के बाहर संचालित देशी शराब के ठेके को हटाने की मांग अब प्रशासनिक स्तर पर विवाद का विषय बन गई है। एक ओर एसपी रेलवे ने दैनिक यात्रियों की सुरक्षा, शराबियों के उत्पात और संभावित दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए जिलाधिकारी बाराबंकी को पत्र भेजकर जनहित में ठेका हटाने की सिफारिश की है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए ठेके को यथावत रखने का पक्ष रखा है।

आबकारी विभाग की ओर से आबकारी निरीक्षक द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित देशी शराब के ठेके से सरकार को प्रतिवर्ष छह करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रेलवे स्टेशन से ठेके की दूरी लगभग 100 मीटर है, जिससे नियमों के अनुपालन का दावा किया गया है।

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उधर, एसपी रेलवे का कहना है कि रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित इस ठेके पर शराब पीने वालों की भीड़ लगी रहती है। कई यात्री भी यहां शराब का सेवन करने के बाद नशे की हालत में ट्रेन में चढ़ने या रेलवे ट्रैक पार करने का प्रयास करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। कई जानलेवा हादसे बीतो दिनों हो भी चुके हैं। इसके अलावा शराबियों के कारण स्टेशन परिसर और आसपास कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित होती है।

आबकारी विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों और दैनिक यात्रियों का कहना है कि स्टेशन के बाहर शराबियों का जमावड़ा, आए दिन होने वाला हंगामा तथा महिलाओं और परिवारों को होने वाली असुविधा लंबे समय से चिंता का कारण बनी हुई है। उनका मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस मामले में उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।

डीएम के फैसले पर टिकीं निगाहें

अब इस पूरे मामले निगाहें जिलाधिकारी बाराबंकी के निर्णय पर टिकी हैं कि यात्रियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है या फिर आबकारी विभाग द्वारा बताए गए सालाना छह करोड़ रुपये के राजस्व को ध्यान में रखकर मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखा जाता है।

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