मास्टर माइंड की तलाश में अहमदाबाद जाएगी पुलिस टीम
फर्जी वायरस अलर्ट दिखाकर करते थे ठगी, ओमेक्स काल सेंटर का खेल
कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार: शहीद पथ स्थित ओमेक्स आर-2 अपार्टमेंट में पकड़े गए अंतरराष्ट्रीय फर्जी काल सेंटर की जांच में नया खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर पर फर्जी वायरस और सिक्योरिटी अलर्ट दिखाकर उन्हें जाल में फंसाता था। इसके बाद खुद को माइक्रोसाफ्ट या कंप्यूटर सिक्योरिटी विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों से लाखों रुपये की ठगी की जाती थी। पुलिस ने फ्लैट से बरामद लैपटाप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को फारेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। वहीं, मास्टरमाइंड यश और प्रकाश की गिरफ्तारी के लिए अहमदाबाद समेत कई राज्यों में दबिश दी जा रही है।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक, काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर), डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी इनपुट के आधार पर दोनों आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की जा रही है। अहमदाबाद पुलिस से भी संपर्क किया गया है। आशंका है कि दोनों की गिरफ्तारी के बाद अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े कई बड़े राज सामने आएंगे। जांच एजेंसियां साइबर ठगी से अर्जित रकम की मनी ट्रेल भी खंगाल रही हैं। बैंक खातों, डिजिटल वालेट, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन और संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है।
पीड़ित को जैसे ही जाल में फंसाते थे तो वह टोलफ्री नं बर पर काल करता, काल भारत स्थित ओमेक्स के फर्जी काल सेंटर में पहुंचती। शुक्रवार को छापेमारी के दौरान गिरफ्तार सात आरोपितों को शनिवार को जेल भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक जब्त डिजिटल उपकरणों की फारेंसिक जांच से ई-मेल, चैट, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की परतें खुलेंगी। इससे देश और विदेश में फैले पूरे साइबर नेटवर्क के साथ इस गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
