S. Janaki Death: नहीं रहीं एस. जानकी.... 48 हजार से अधिक गीतों की अमर आवाज को देशभर ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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Published By Muskan Dixit
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केरल और कर्नाटक के नेताओं समेत फिल्म जगत की हस्तियों ने जताया शोक; राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार।

तिरुवनंतपुरम/मैसूरु। भारतीय फिल्म संगीत जगत ने अपनी सबसे प्रतिष्ठित आवाज़ों में से एक को खो दिया। दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी का शनिवार को कर्नाटक के मैसूरु स्थित एक निजी अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन पर रविवार को देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विभिन्न राज्यों के जनप्रतिनिधियों और फिल्म जगत की नामी हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एस. जानकी के निधन से भारत ने संगीत जगत की एक महान विभूति को खो दिया है। उन्होंने कहा कि छह दशक से अधिक लंबे करियर में जानकी ने हिंदी, उड़िया, तुलु, उर्दू, पंजाबी, बांग्ला सहित लगभग 20 भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाकर कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि एस. जानकी का जाना भारतीय संगीत और संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि उनकी मधुर आवाज़ और विविध भावनाओं को अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।

48 हजार से अधिक गीतों की अमिट विरासत

23 अप्रैल 1938 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर में जन्मी एस. जानकी ने अपने शानदार करियर में 48,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। उन्होंने मुख्य रूप से कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में अपनी आवाज़ दी, लेकिन हिंदी सहित कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी उनके गीत बेहद लोकप्रिय रहे। अपने प्रशंसकों के बीच वह प्यार से 'जानकी अम्मा' और 'दक्षिण भारत की स्वर कोकिला' के नाम से जानी जाती थीं।

राजनीतिक और फिल्मी जगत ने दी श्रद्धांजलि

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने कहा कि एस. जानकी का निधन भारतीय सिनेमा और संगीत के स्वर्णिम दौर के अंत जैसा है। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज़ हर मलयाली के दिल में बसती थी और उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।

अभिनेता मोहनलाल ने उन्हें "भारत की बुलबुल" बताते हुए कहा कि उनकी आवाज़ ने मलयालम सहित कई भाषाओं के फिल्म संगीत को नई पहचान दी। अभिनेता ममूटी, अभिनेत्री मंजू वारियर, गायक जी. वेणुगोपाल, एम.जी. श्रीकुमार और संगीतकार एम. जयचंद्रन सहित अनेक कलाकारों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी और भारतीय संगीत में उनके योगदान को याद किया।

राजकीय सम्मान के साथ होगी अंतिम विदाई

कर्नाटक सरकार ने घोषणा की है कि एस. जानकी का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि मैसूरु में आम लोगों के अंतिम दर्शन की व्यवस्था की गई है और उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए सरकार फिल्म जगत के साथ मिलकर आगे की योजना बनाएगी।

उन्होंने बताया कि जानकी को अपने जीवन में चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 33 राज्य स्तरीय पुरस्कार और कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।

पद्म भूषण लेने से किया था इनकार

वर्ष 2013 में एस. जानकी ने पद्म भूषण सम्मान स्वीकार करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि यह सम्मान उन्हें बहुत देर से दिया जा रहा है। उनका यह निर्णय भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

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