CJP Protest: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, पुलिस को नोटिस; बॉडी कैमरा और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई और सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से चार सप्ताह में जवाब मांगा। अदालत ने बॉडी कैमरा और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया।
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई और 18 जुलाई को जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने के मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को पुलिस के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
हाईकोर्ट ने फुटेज सुरक्षित रखने के दिए निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सभी बॉडी कैमरा फुटेज और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनकी जांच की जा सके।
याचिकाकर्ता ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था और बिना किसी पूर्व चेतावनी के लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने दलील दी कि राज्य की किसी भी कार्रवाई की समीक्षा संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मनमानी के मानदंड पर की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं हुईं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
'20 जुलाई तक कोई हिंसा नहीं हुई'
याचिकाकर्ता पक्ष के एक अन्य वकील विकास सिंह ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारी करीब 20 दिनों से शांतिपूर्वक जंतर-मंतर पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक ने पहले ही 20 जुलाई को संसद मार्च की घोषणा कर दी थी और उस दिन तक किसी भी प्रकार की हिंसा की सूचना नहीं थी।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न राज्यों से छात्र, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और आम नागरिक मौजूद थे। उनका दावा था कि अब तक ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की थी।
FIR और उच्चस्तरीय जांच की मांग
अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत से कहा कि जिन पुलिसकर्मियों की पहचान की जा सकती है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गई लाठियों में कीलें लगी थीं और कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं।
उन्होंने अदालत से पूरी घटना की स्वतंत्र जांच कराने, पुलिस द्वारा बल प्रयोग से जुड़े निर्देश, आंसू गैस और अन्य सामग्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा सीसीटीवी और अन्य वीडियो साक्ष्यों को संरक्षित रखने का अनुरोध किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस घटना में 90 से अधिक छात्र घायल हुए हैं और घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
