अभिजीत दीपके के परिवार ने ली राहत की सांस, मां बोलीं- 'घर लौटे तो कसकर गले लगाऊंगी और आरती उतारूंगी'
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके के घर में जश्न
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP (कॉजपा) संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार की महीनों पुरानी चिंता राहत में बदल गई। छत्रपति संभाजीनगर में मां अनीता दीपके ने भावुक होकर कहा कि बेटे के घर लौटने पर वह आरती उतारकर स्वागत करेंगी, वहीं पिता ने आंदोलन के दौरान झेले डर और धमकियों का दर्द बयां किया।
मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से दीपके के माता-पिता की महीनों पुरानी चिंता और डर आखिरकार राहत और खुशी में बदल गया। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में रहने वाले अभिजीत के माता-पिता ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए अपने संघर्ष, डर और अब मिली राहत को बयां किया।
'उसकी ईमानदारी की जीत हुई, अब बस घर आ जाए बेटा'
अभिजीत की मां अनीता दीपके ने आंखों में खुशी के आंसू पोछते हुए कहा, "मैं बेहद खुश हूं। उसकी ईमानदारी की जीत हुई है। युवाओं के समर्थन ने उसे यह बड़ी सफलता दिलाई। अब मैं उससे कहूंगी कि वह जल्दी घर आ जाए। अगर वह नहीं आया, तो हम खुद जाकर उसे लाएंगे। इस बार मैं उसकी आरती उतारूंगी और कसकर गले लगाऊंगी।" मां ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू होने के बाद से उनकी रातें बिना सोए बीतती थीं। वह हर सुबह फोन देखने से डरती थीं कि कहीं बेटे से जुड़ी कोई अनहोनी या परेशान करने वाली खबर न आ जाए।
'हम पर शारीरिक नुकसान की धमकियां थीं, डर से कोंकण चले गए थे' अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके ने अपने पुराने दिनों के खौफनाक दौर को याद करते हुए बताया कि उनके परिवार की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं रही है। पिता ने बताया कि उन्होंने गिरफ्तारी के डर से जून में अभिजीत को अमेरिका से भारत न लौटने की सलाह दी थी।
स्वास्थ्य पर पड़ा बुरा असर
भगवानराव ने कहा, "हम इतने डरे हुए थे कि शुरुआती दिनों में घर छोड़कर कोंकण चले गए थे। हम पर शारीरिक नुकसान पहुँचाने का दबाव था। डर और चिंता की वजह से हमारा स्वास्थ्य गिर गया था, हम दिन में मुश्किल से एक रोटी खा पाते थे।" 20 जुलाई की घटना को याद कर कांप उठे पिता: 20 जुलाई को पुलिस द्वारा अभिजीत को खींचे जाने का जिक्र करते हुए पिता ने कहा, "मुझे लगा था कि अगर मेरा बेटा पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो नहीं बचेगा। भगवान की कृपा से वह सुरक्षित है।"
धर्मेंद्र प्रधान के फैसले की सराहना
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टिप्पणी करते हुए भगवानराव दीपके ने उदारता दिखाई। उन्होंने कहा, "इसे किसी की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इतने बड़े पद को छोड़ने के लिए बड़े दिल की जरूरत होती है। इस्तीफा देते समय भी उन्होंने छात्रों से पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की और उनके हितों के बारे में सोचा।" अभिजीत के अगले राजनीतिक कदम पर पिता ने कहा कि उन्होंने पहले अरविंद केजरीवाल के साथ काम किया है और राजनीति को करीब से देखा है। उन्होंने कहा, "मुझे व्यक्तिगत रूप से राजनीति पसंद नहीं है, लेकिन आगे वह जो भी निर्णय लेगा, मैं अपने बेटे के साथ रहूंगा।"
