बरेली में गुरु पूर्णिमा का जश्न : भजनों से गूंजा माहौल, ध्यान में डूबे लोग, पेड़ों के लिए भी उठी आवाज

Amrit Vichar Network
Edited By Virendra Pandey
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बरेली, अमृत विचार :  गुरु पूर्णिमा पर बरेली में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जहां पूजा-पाठ के साथ लोगों ने कुछ पल खुद के लिए भी निकाले। स्पर्श रिसॉर्ट में आयोजित आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम में लोग ध्यान में बैठे, भजनों को सुना और गुरु के महत्व को समझा। खास बात यह रही कि कार्यक्रम में शामिल कुछ डॉक्टरों ने पहली बार ध्यान किया. ध्यान के बाद उनका अनुभव था कि मन को शांत करने की यह प्रक्रिया इतनी सहज हो सकती है, इसका उन्हें पहले अंदाजा नहीं था। इस दौरान गुरु बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान बिना आत्मा नहीं। ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म सब गुरु की ही देन है।

रविशंकर जी
आर्ट ऑफ लिविंग, बरेली चैप्टर में आयोजित गुरु पूर्णिमा का कार्यक्रम

 

दरअसल, आर्ट ऑफ लिविंग, बरेली चैप्टर पिछले 21 वर्षों से गुरु पूर्णिमा का आयोजन करता आ रहा है। हर साल आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनायी जाती है। यह एक ऐसा दिन है जब व्यक्ति अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।  इस बार भी मंगलवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ध्यान, ज्ञान और भजन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसकी शुरुआत गुरु श्री श्री रवि शंकर की पूजा से हुई। 

अमृत विचार (5)

वक्ताओं ने सुनाये गुरु के संदेश

इस अवसर पर वक्ताओं ने श्री श्री रवि शंकर जी के संदेश को बताते हुये कहा कि गुरु हर एक व्यक्ति के जीवन में अहम होता है।  भारतीय संस्कृति में गुरु और शिष्य परंपरा का विशेष महत्व है। यह परंपरा सदियों से ऐसी ही चली आ रही है। व्यक्ति के जीवन को सही मार्ग में ले जाने के लिए एक सही गुरु का होना बेहद जरूरी है। गुरु के बिना किसी भी व्यक्ति का कोई मूल्य नहीं है। हर एक शास्त्र में गुरु के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है। इस दौरान वक्ताओं ने यह भी कहा कि गुरु व्यक्ति की भलाई और उसे सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ाने का कार्य करता है। वह आपके जीवन में सिर्फ ज्ञान ही नहीं भरता, बल्कि आपके जीवन को सही मोड़ पर ले जाने और जीवन शक्ति का संचार भी करता है।

ऑर्ट ऑफ लिविंग की भजन संध्या
जब गूंजे गुरु के भजन तो थिरक उठे कदम... आर्ट ऑफ लिविंग की भजन संध्या में भक्ति के रंग में झूमे लोग

 

श्री श्री रविशंकर जी कहते हैं कि गुरु तत्व हमारे जीवन में व्याप्त है हमारी माँ हमारी पहली गुरु है और फिर विज्ञान से लेकर अध्यात्म तक, जन्म से लेकर मृत्यु तक, गुरु तत्व हमारे जीवन में व्याप्त है। गुरुदेव कहते हैं कि हर विधा के लिए एक गुरु निर्धारित है, उदाहरण के लिए एक धर्म गुरु (धार्मिक), एक कुल गुरु (परिवार), एक राजगुरु (राज्य के लिए गुरु), एक विद्या गुरु (किसी विशेष विधा के लिए गुरु) और एक सतगुरु जिसे हम आध्यात्मिक गुरु भी कहते हैं। वह कहते हैं कि गुरु आपको सिर्फ ज्ञान ही नहीं देता है, बल्कि वह आपके अंदर जीवन शक्ति को भी जगाने में मदद करता है। गुरु विवेक तक जाग्रत करता है। ज्ञान से बुद्धि नहीं आती, लेकिन बुद्धि की अवस्था में ज्ञान अंतर्निहित होता है।

एक सप्ताह से चल रहा है वृक्षारोपण कार्यक्रम

आर्ट ऑफ लिविंग के मीडिया कॉर्डिनेटर सौरभ मेहरोत्रा ने बताया कि यहां गुरुपूर्णिमा के एक सप्ताह पहले से वृक्षारोपण का कार्यक्रम चल रहा है। उन्होंने बताया कि सांसें हो रही कम, आओ पेड़ लगायें हम नारे के साथ लोगों ने इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि एक शिक्षक शिक्षा देते हैं, लेकिन गुरु दीक्षा देते हैं। गुरु आपको जानकारियों से नहीं भरते बल्कि वे आपके भीतर जीवनी शक्ति जाग्रत करते हैं । गुरु की उपस्थिति में आपके शरीर का कण-कण जीवन्त हो जाता है उसी को दीक्षा कहते हैं।

गुरु पुर्णिमा के मौके पर पूजा करती भक्तजन
गुरु पुर्णिमा के मौके पर आयोजित कार्यक्रम का आगाज गुरु की पूजा के साथ हुआ

 

इस दौरान दिल्ली से आये गगन राठौर के द्वारा सत्संग का भी आयोजन हुआ। जिसमें गगन राठौर ने अपनी मधुर आवाज से जय गुरु ओंकारा और देवी नन्दिनी ने भजन गाकर वहाँ पर बैठे भक्तजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं आर्ट ऑफ लिंविग के गुरु पंडितों द्वारा गुरुपूजा से कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें मुख्य रुप से प्रीति नुनियाल, पूजा नारनोली, रीना अग्रवाल, शमा गुप्ता, अमृत विचार मीडिया समूह के सीओओ पार्थो कुनार, श्वेता कुनार, सारुल श्री, अनीता अग्रवाल आदि शामिल हुए।

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