Ajinkya Rahane Retirement: अलविदा .....भारतीय क्रिकेट का चमकता सितारा, हमेशा याद रहेंगी ऐतिहासिक पारियां
भारतीय क्रिकेट के साइलेंट वॉरियर अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास
अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। जानिए 85 टेस्ट, 5000+ रन, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत और उनके शानदार क्रिकेट करियर की पूरी कहानी
दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। अपने शांत स्वभाव, शानदार बल्लेबाजी और बेहतरीन कप्तानी के लिए पहचाने जाने वाले रहाणे ने बिना शोर-शराबे के भारतीय क्रिकेट में बड़ा योगदान दिया।
ऑस्ट्रेलिया में रचा था इतिहास
साल 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में विराट कोहली की गैरमौजूदगी में रहाणे ने भारतीय टीम की कप्तानी संभाली। एडिलेड टेस्ट में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद उन्होंने टीम को संभाला और मेलबर्न में शानदार शतक जड़कर भारत को वापसी दिलाई। उनकी कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज हराई। यह जीत भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार पलों में गिनी जाती है।
85 टेस्ट में 5,000 से ज्यादा रन
अजिंक्य रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 12 शतक लगाए और 5,000 से अधिक रन बनाए। वह लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम की बल्लेबाजी की मजबूत कड़ी रहे।
हमेशा टीम को रखा खुद से आगे
रहाणे को हमेशा एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में याद किया जाएगा, जिसने व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम की सफलता को महत्व दिया। ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीतने के बाद भी उन्होंने जश्न का केंद्र बनने की बजाय साथी खिलाड़ियों को आगे रखा। उनकी सादगी और खेल भावना की हर जगह सराहना हुई।
कप्तान के रूप में भी रहे अजेय
रहाणे ने जिन छह टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, उनमें टीम एक भी मैच नहीं हारी। उन्होंने युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को शानदार तरीके से संभाला।
शालीनता बनी उनकी पहचान
मैदान के अंदर और बाहर रहाणे हमेशा शांत और अनुशासित नजर आए। उन्होंने कभी विवादों में पड़ने के बजाय अपने प्रदर्शन से जवाब दिया। हालांकि करियर के आखिरी दौर में स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ संघर्ष और लगातार खराब प्रदर्शन के कारण वह टीम से बाहर हो गए। इसके बावजूद उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। अजिंक्य रहाणे का करियर इस बात की मिसाल है कि बिना सुर्खियों में रहे भी कोई खिलाड़ी अपने प्रदर्शन, नेतृत्व और व्यवहार से भारतीय क्रिकेट पर गहरी छाप छोड़ सकता है।
