स्वास्थ्य का दुश्मन
कोविड-19 से मृत्यु दर और वायु प्रदूषण के बीच गहरा संबध है। आश्चर्यजनक रूप से कोरोना से मरने वाले 78 प्रतिशत लोगों के फेफड़ों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड मिला, जो वायु प्रदूषण की ओर इशारा कर रहा है। दुनिया के कई हिस्सों में इस बात के सबूत मिल चुके हैं कि वायु प्रदूषण के जरिए कोरोना …
कोविड-19 से मृत्यु दर और वायु प्रदूषण के बीच गहरा संबध है। आश्चर्यजनक रूप से कोरोना से मरने वाले 78 प्रतिशत लोगों के फेफड़ों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड मिला, जो वायु प्रदूषण की ओर इशारा कर रहा है। दुनिया के कई हिस्सों में इस बात के सबूत मिल चुके हैं कि वायु प्रदूषण के जरिए कोरोना वायरस का प्रसार तेजी से होता है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन से पता चला है कि पीएम 2.5 में केवल एक माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर की वृद्धि कोविड-19 की मृत्यु दर में आठ प्रतिशत की वृद्धि से जुड़ी है। भारत में स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रतिकूल प्रभावों के मामले बढ़ रहे हैं। कोरोना वायरस के मुकाबले प्रदूषित हवा ज्यादा घातक है।
द लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि भारत में 2019 के दौरान 1.67 मिलियन समय से पहले मौतें हुईं। यह देश में कोरोना वायरस की मृत्यु के 10 गुना से भी अधिक है। समय से पहले मौत और बीमारी का एक प्रमुख कारण वायु प्रदूषण है। वायु प्रदूषण के खिलाफ भारत की लड़ाई कई मोर्चों पर विफल हो रही है। इसके बढ़ने के प्रमुख कारणों में अनियंत्रित औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां शामिल हैं। लेकिन यह केवल समस्या का एक हिस्सा है। वायु प्रदूषण जोखिम आमतौर पर परिवेशी कण पदार्थ प्रदूषण, घरेलू वायु प्रदूषण और कुछ हद तक ट्रोपोस्फेरिक ओजोन के लिए निर्धारित होते हैं।
परिवेशी कण पदार्थ प्रदूषण के मुख्य स्रोत आवासीय और वाणिज्यिक बायोमास बर्निंग, विंडब्लाउन मिनरल डस्ट, ऊर्जा उत्पादन के लिए कोयला जलाना, औद्योगिक उत्सर्जन, कृषि अवशेष जलाना, अपशिष्ट जलाना, ईंट भट्टे, परिवहन वाहन और डीजल जनरेटर हैं। घरेलू वायु प्रदूषण मुख्य रूप से खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन के उपयोग के कारण होता है। जबकि परिवहन, बिजली संयंत्रों, कारखानों से निकलने वाले प्रदूषक और अन्य स्रोत विभिन्न स्रोतों से उत्सर्जित हाइड्रोकार्बन के साथ सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रतिक्रिया करते हैं। वायु प्रदूषण न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि अर्थव्यवस्था गिरने के लिए भी जिम्मेदार है।
देश के संदर्भ में वायु प्रदूषण का सामना करना भी सामाजिक न्याय और गरीबी उन्मूलन से जुड़ा है। उन्नत चूल्हा अभियान और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं के महत्व को समझना होगा। देश की परिवहन प्रणाली को भी आधुनिक बनाने की आवश्यकता है, जिसमें हरित ऊर्जा को प्राथमिकता दी जाए। प्रदूषण के विषय में सार्वजनिक जड़ता तोड़ने को शिक्षा और जागरूकता पैदा की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता में देखी जा रही गिरावट को रोकने के लिए प्रौद्योगिकी की उपलब्धता को भी सुलभ बनाया जाना चाहिए।
