सेवा, शिक्षा और मानवता को समर्पित
बचपन की कुछ घटनाएं जीवन की दिशा तय कर देती हैं। मैं जब लगभग आठ वर्ष की थी, तब एक बार गंभीर रूप से बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती हुई। उस समय डॉक्टरों को मरीजों की पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ सेवा करते हुए देखा। उनकी मुस्कान, आत्मविश्वास और मरीजों के प्रति करुणा ने मेरे बाल मन पर अमिट छाप छोड़ी। उसी दिन मन में यह संकल्प जन्मा कि जीवन में डॉक्टर बनकर जरूरतमंद और पीड़ित लोगों की सेवा करूंगी।
इसी लक्ष्य को लेकर मैंने कठिन परिश्रम किया और देश के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू), लखनऊ से एमबीबीएस तथा एमडी (प्रसूति एवं स्त्री रोग) की शिक्षा प्राप्त की। अध्ययन के दौरान सदैव उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का प्रयास किया और एमडी में सर्वश्रेष्ठ छात्रा (गोल्ड मेडल) प्राप्त करना मेरे जीवन के सबसे गौरवपूर्ण क्षणों में से एक रहा। यह सम्मान केवल मेरी उपलब्धि नहीं था, बल्कि मेरे शिक्षकों के मार्गदर्शन, माता-पिता के संस्कार और निरंतर मेहनत का परिणाम था।
मेरे जीवन का उद्देश्य केवल एक सफल चिकित्सक बनना नहीं था, बल्कि ऐसा डॉक्टर बनना था, जिसे मरीजों की मुस्कान में अपनी खुशी और आत्मसंतोष मिले। इसलिए मैंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से सरकारी चिकित्सा सेवा को चुना और वर्ष 2007 में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर में प्रवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं। इसके बाद लगभग दस वर्षों तक राजकीय मेडिकल कॉलेज, कन्नौज में कार्य करने का अवसर मिला। वहां मैंने सीमित संसाधनों में भी मरीजों को बेहतर उपचार देने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने का भरसक प्रयास किया। प्रत्येक कठिन प्रसव, प्रत्येक गंभीर मरीज और प्रत्येक सफल उपचार ने मुझे और अधिक संवेदनशील तथा जिम्मेदार चिकित्सक बनाया।
मेरे व्यावसायिक जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव 24 जुलाई 2024 को आया, जब मुझे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष बनने का अवसर मिला। यह केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सेवा, नेतृत्व और नई पीढ़ी के चिकित्सकों को सही दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी थी।
विभागाध्यक्ष बनने के बाद मेरा पहला लक्ष्य मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता और चिकित्सा शिक्षा दोनों में निरंतर सुधार लाना रहा। अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज मैटरनिटी हॉस्पिटल में बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करने, आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने, गंभीर मरीजों के उपचार को सुदृढ़ बनाने तथा विद्यार्थियों और रेजिडेंट्स के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के लिए मैंने अपनी पूरी टीम के साथ निरंतर प्रयास किए। आज जब मरीज संतुष्टि के साथ स्वस्थ होकर अपने घर लौटते हैं, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।
