Bareilly News : चाइनीज मांझे से फिर बहा खून, महादेव पुल पर वैभव का गला कटने के बाद अब विद्युतर्की घायल
बरेली में खून बहा रहा चाइनीज मांझा, प्रतिबंध के बावजूद नहीं लग पा रही प्रभावी रोक
बरेली में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा लगातार लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है। ताजा घटना में किला पुल के पास एक बिजलीकर्मी का चेहरा मांझे से कटकर लहूलुहान हो गया। प्रशासन की रोक के बावजूद जानलेवा मांझे की बिक्री जारी है।
बरेली, अमृत विचार। बरेली में चाइनीज मांझे का खूनी खेल जारी है। जिम्मेदार बेखबर हैं। शायद तब तक, जब तक किसी की जान न चली जाए! पिछले दिनों यूपी के गन्ना राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार के भतीजे आदित्य वीर सिंह गंगवार का, श्यामगंज पुल पर मांझे से गला कट गया था। मुश्किल से जान बची। अब किला पुल के पास एक विद्यतुरकर्मी मांझे की चपेट में आकर लहूलुहान हो गए। उनके चेहरे पर गहरे कट लग गए हैं। गनीमत रही कि गला बच गया, अन्यथा बड़ा हादसा तय था।
सुभाषनगर थाना क्षेत्र के करेली गांव निवासी सोहिल कमाल, फतेहगंज पश्चिमी में विद्युत विभाग के एसडीओ कार्यालय में तैनात हैं। शुक्रवार की शाम को सोहिल कमाल कार्यालय से घर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक किला पुल के पास पहुंची। अचानक से चाइनीज मांझा चेहरे से टकरा गया। तेज धार वाले मांझे से उनके चेहरे पर कई जगह गहरे घाव हो गए। किसी तरह सोहिल ने खुद को संभाला और मांझे को पकड़कर गर्दन तक जाने से रोका।
गाड़ी की स्पीड़ धीमी थी, इसलिए वह खुद को संभालने में सफल रहे। घटनास्थल पर राहगीरों की भीड़ जुट गई। घायल सोहिल को प्राथमिक उपचार केंद्र पहुंचाया गया। उपचार के बाद डॉक्टरों ने छुट्टी कर दी।
बच गया गला
सोहिल कमाल के मुताबिक, जैसे ही मांझा चेहरे से टकराया, उन्होंने उसे पकड़ लिया। गाड़ी की स्पीड स्लो थी। वह रुक गए। हालांकि तब तक उनका चेहरा और कपड़े खून से भीग चुके थे। राहगीर भी ये माजरा देखकर हैरान रह गए। रुककर सोहिल को संभाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।
तीन दिन पहले महादेव पुल पर हादसा
बरेली में अभी तीन दिन पहले की घटना है। महादेव पुल 12वीं के कक्षा के एक छात्र वैभव प्रताप सिंह का मांझे से गला कट गया था। खून से लथपथ वैभव सड़क पर गिर गए। राहगीरों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया था। वैभव के गले पर मांझे का गहरा कट लगा था। इससे उसकी हालत गंभीर बनी रही।
बरेली में खून बहाता मांझा
बरेली शहर ही नहीं बल्कि पूरे परिक्षेत्र में चाइनीज मांझे से बड़ी घटनाएं सामने आती रहती हैं। बरेली में पिछले एक महीने के अंदर कम से कम तीन घटनाएं हो चुकी हैं। मंत्री के भतीजे वीर और वैभव काफी बुरी तरह से घायल हो गए। घटना के बाद प्रशासन एक-दो दिन के लिए सक्रिय होता है। छापेमारी के बाद फिर कार्रवाई थम जाती और इसी बीच कोई दूसरी घटना सामने आ जाती है।
कैसे बिक रहा प्रतिबंधित मांझा
चाइनीज मांझा प्रतिबंधित है। बिक्री पर रोक लगी है। इसके बावजूद शहर में चाइनीज मांझे से खौफनाक घटनाएं सामने आ जा रही हैं। अब सवाल ये है कि जब चाइनीज मांझा प्रतिबंधित है तो फिर इसकी बिक्री कैसे हो रही? क्या छापेमारी के नाम पर सिर्फ रस्मअदायगी की जाती है? आखिर इस पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है।
