बरेली: गन्ना खरीद में खुला खेल, किसान बेबस और अफसर फेल
अमृत विचार, बरेली। कोरोना काल में किसानों को राहत देने के मकसद से लागू की गई प्रदेश सरकार की ऑनलाइन पर्ची वितरण व्यवस्था हाईटेक करने के दावे धरे रह गए। कुछ सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में पल रहे माफिया गन्ना खरीद में हावी हो गए हैं। सट्टा पर्ची में गड़बड़ी की शिकायतें चरम पर हैं। …
अमृत विचार, बरेली। कोरोना काल में किसानों को राहत देने के मकसद से लागू की गई प्रदेश सरकार की ऑनलाइन पर्ची वितरण व्यवस्था हाईटेक करने के दावे धरे रह गए। कुछ सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में पल रहे माफिया गन्ना खरीद में हावी हो गए हैं। सट्टा पर्ची में गड़बड़ी की शिकायतें चरम पर हैं।
माफिया छोटे किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमानी कीमत पर उनका गन्ना खरीद पर्ची वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था में भी सेंध लगा रहे हैं। चहेतों के नाम की पर्ची पर गन्ना डलवाया जा रहा है। इस खेल में एक बड़ा रैकेट जिले का गन्ना फरीदपुर की चीनी मिल में भेजकर मोटी कमाई करने में जुटा है। नेताओं के संरक्षण में चल रहे इस खेल की वजह से किसान बेबस और अफसर फेल नजर आ रहे हैं।
जनपद में इस वर्ष करीब पौने दो लाख किसानों ने 90 हजार हेक्टेयर में गन्ना बोया है जबकि गत वर्ष रकबा 1.04 लाख हेक्टेयर था। प्रदेश सरकार ने पिछले बार सट्टा पर्ची में गड़बड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए और कोरोना काल में परेशान किसानों को सहूलियत देने के मकसद से पर्ची वितरण की व्यवस्था हाईटेक करते हुए पूरी तरह ऑनलाइन करा दिया।
माना जा रहा था इस व्यवस्था से किसानों को सहूलियत होगी। बावजूद इसके माफिया खेल कर रहे हैं। सांठगांठ से चल रहे इस खेल की भनक अफसरों को भी है। पर्ची वितरण में धांधली की शिकायतें आए दिन पहुंच रही हैं मगर कोई सुनने वाला नहीं है। सीधे तौर पर कहा जाए तो बेसिक कोटा बढ़ाने के लिए माफिया छोटे किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। इस खेल में विभाग के कर्मचारी भी शामिल बताए जाते हैं।
इस बार किसानों ने बढ़ाया गेहूं का रकबा
गन्ना घटतौली से लेकर पर्ची समय से नहीं मिलने, भुगतान में देरी समेत कई अन्य तरीके की असुविधा होने पर किसानों ने गेहूं का रकबा बढ़ा दिया है। बताया गया है कि जिले में वर्ष 2019-20 में करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि पर करीब पौने दो लाख किसानों ने गन्ने की फसल लगाई थी। वर्ष 2020-21 में 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर किसानों ने गन्ना उगाया है। ऐसे में करीब बीस हजार हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की फसल नहीं लगी है। किसानों की संख्या भी कम होना बताया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसानों का मानना है कि गन्ने की फसल लगाने से उसके मूल्य का समय से भुगतान नहीं होता है। अगर धान गेहूं की फसल लगाएंगे तो जब चाहे उसे बेचकर अपनी जरूरतों को पूरा कर लेंगे।
किसानों का दर्द
14 बीघा पेड़ी खड़ी है जो सर्वे में दर्ज नहीं है। पांच दिन चक्कर लगाकर रकबा व गन्ना फीड कराया था। अब बताया गया कि पर्ची 15 दिन बाद आएगी। तब तक गेहूं बुवाई लेट हो जाएगी। -मो. रफीक
कोरोना काल में परेशान किसानों की समस्या का समाधान होता नहीं दिख रहा। सेंटरों पर मनमानी और पर्ची समय से नहीं मिलने की वजह से मजबूरी में गन्ना कोल्हुओं पर बेचना पड़ रहा है। -धर्मदास
प्रदर्शन में सर्वे संशोधन का पूरा मौका दिया गया है। फिर भी यदि किसान का रकबा छूटा है तो चढ़वा दिया जाएगा। इसके अलावा भी किसान की कोई समस्या है तो वह कार्यालय आए। उसकी समस्या का समाधान कराया जाएगा।
-पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
