परीक्षाओं पर निर्णय

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Edited By Amrit Vichar
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने साफ कर दिया है कि सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं, ऑफलाइन मोड में कराई जाएंगी। उन्होंने परीक्षा का कार्यक्रम गुरुवार को जारी करने का ऐलान कर दिया है। कोरोना वायरस महामारी के चलते सीबीएसई की 10 और 12 वीं की परीक्षाएं लगातार टलती आ रही हैं। वायरस …

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने साफ कर दिया है कि सीबीएसई की लंबित परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं, ऑफलाइन मोड में कराई जाएंगी। उन्होंने परीक्षा का कार्यक्रम गुरुवार को जारी करने का ऐलान कर दिया है। कोरोना वायरस महामारी के चलते सीबीएसई की 10 और 12 वीं की परीक्षाएं लगातार टलती आ रही हैं।

वायरस आने के प्रारंभिक दिनों में यह कराई जानी थीं लेकिन लॉकडाउन के चलते नहीं हो सकीं। अब तक सीबीएसई को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से इन परीक्षाओं के मोड और कार्यक्रम का इंतजार था। कहा जा रहा था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय परीक्षाएं ऑनलाइन करा सकता है, क्योंकि देश के अधिकांश हिस्सों में कोरोना संक्रमण अभी भी सामने आ रहा है।

अब जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई की परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में कराने का ऐलान कर दिया है तो बात स्कूलों को खोले जाने को लेकर भी होने लगी है। बोर्ड परीक्षाओं के लिए स्कूल खोले जाएंगे ही, निचली कक्षाओं की परीक्षाएं भी कराई जानी हैं। ऐसे में, संभव है कि जल्द स्कूल खोलने पर निर्णय ले लिया जाए। हाल ही में सरकार की ओर से स्कूल खोलने के लिए गंभीरता से विचार किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इस पर निर्णय होना है।

चूंकि स्कूल मार्च में लॉकडाउन लगने के बाद से ही बंद चल रहे हैं। ऐसे में, बच्चों की पढ़ाई भी काफी प्रभावित हुई है। उनकी परीक्षाएं भी नहीं हो सकी हैं। अब जब सीबीएसई की परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में कराई जाएंगी तो जाहिर है कि बाकी परीक्षाएं भी कराने की बात उठेगी।

इसकी वजह यह है कि पिछला शैक्षिक सत्र बीतने जा रहा है। ऐसे में, बच्चों को नई कक्षाओं की तैयारी भी करनी है। उधर, यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी कराने की तैयारी की जा रही है। इस बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में बड़ी संख्या में परीक्षार्थी शामिल होते हैं। ऐसे में, परीक्षा कक्षों में बच्चों को एक साथ बैठाकर परीक्षा कराना किसी जोखिम से कम नहीं है।

बहरहाल, सरकार को चाहिए कि बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा को लेकर जो भी निर्णय ले, पहले से ही खूब सोच-विचार कर लेना चाहिए। ऐसा न हो कि कोरोना संक्रमण से बच्चों को बचाव के लिए जो स्कूल अब तक बंद चल रहे हैं, उनके खुलने पर मासूम बच्चे संक्रमण से खुद को बचा न पाएं, वरना संक्रमण की स्थिति बिगड़ सकती है।