Shravasti Alauddin Encounter : 23 पुलिसकर्मी घेराबंदी में थे, फिर भी कोई घायल नहीं! हाईकोर्ट ने उठाए सवाल; CBI करेगी ‘एनकाउंटर’ की जांच
श्रावस्ती के इकौना में मई 2025 में हुए छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन के कथित पुलिस एनकाउंटर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने 23 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद किसी के घायल न होने और 15 मीटर की दूरी से दोनों गोलियां आरोपी के पैरों में लगने के पुलिस के दावे पर सवाल उठाए हैं।
श्रावस्ती, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के इकौना में मई 2025 में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन के कथित एनकाउंटर की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने प्रथमदृष्टया पुलिस की एफआईआर में बताए गए घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच को जरूरी माना है।
बच्ची को ले जाने के आरोप से शुरू हुआ था मामला
मामला मई 2025 का है। 9 मई को इकौना थाने में सात वर्षीय बच्ची को ले जाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके तीन दिन बाद 12 मई को तत्कालीन इकौना एसएचओ अश्विनी कुमार दुबे ने दूसरी एफआईआर दर्ज कराई। इस एफआईआर में पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी अलाउद्दीन नेपाल भागने की फिराक में था। पुलिस के मुताबिक, एसएचओ और एसडब्ल्यूएटी टीम ने अंधरपुरवा पुल के पास उसे घेर लिया था।
पुलिस का दावा- आरोपी ने की थी फायरिंग
पुलिस के मुताबिक, घेराबंदी के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में तत्कालीन एसएचओ ने अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चलाई, जो आरोपी के दोनों पैरों में लगी थी। हालांकि, हाईकोर्ट के सामने पुलिस के इस घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े हुए।
23 पुलिसकर्मी मौजूद थे, फिर कोई घायल क्यों नहीं हुआ?
अदालत ने इस बात पर विशेष गौर किया कि कथित मुठभेड़ के दौरान एक ही वाहन में 23 पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन आरोपी की कथित फायरिंग में एक भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ। कोर्ट ने रात के अंधेरे में करीब 15 मीटर की दूरी से चली दोनों गोलियों के सीधे आरोपी के दोनों पैरों में लगने के पुलिस के दावे पर भी सवाल उठाए।इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने माना कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है।
एनकाउंटर के बाद सभी 23 पुलिसकर्मियों को मिला था ‘गुड वर्क’
हाईकोर्ट के सामने यह तथ्य भी आया कि कथित एनकाउंटर में शामिल सभी 23 पुलिसकर्मियों को ‘गुड वर्क’ के नाम पर तत्काल पुरस्कृत किया गया था। अदालत ने इस पहलू को भी जांच के दायरे में रखने की जरूरत बताई है। अब सीबीआई जांच में यह भी स्पष्ट होगा कि एनकाउंटर के बाद पुलिसकर्मियों को पुरस्कार देने की प्रक्रिया और उसके आधार क्या थे।
2012 के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ था अलाउद्दीन
मामले में एक और अहम तथ्य सामने आया। अलाउद्दीन को वर्ष 2012 के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया और इस आशंका पर गौर किया कि कहीं पुराने मामले से जुड़ी रंजिश के कारण उसके खिलाफ कार्रवाई तो नहीं की गई। हालांकि, इस आशंका की वास्तविकता अब स्वतंत्र जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
तीन महीने में जांच रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश
हाईकोर्ट ने सीबीआई निदेशक को जांच के लिए सक्षम अधिकारियों की टीम गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यथासंभव तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। जांच में तत्कालीन एसएचओ की शूटिंग क्षमता समेत घटनाक्रम से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी। अब इस मामले में सीबीआई की जांच पर नजर रहेगी, जिससे कथित एनकाउंटर के घटनाक्रम और पुलिस के दावों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है।
