डायबिटीज को कंट्रोल रखने में सिर्फ दवा नहीं, डाइट और दिनचर्या भी अहम; जानें आयुर्वेद का क्या है तरीका
डायबिटीज प्रबंधन में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय खानपान, शारीरिक सक्रियता, योग, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। आयुर्वेद भी स्वस्थ जीवनशैली को महत्वपूर्ण मानता है।
वर्तमान समय में डायबिटीज (मधुमेह) विश्वभर में तेजी से बढ़ने वाली जीवनशैली संबंधी बीमारियों में से एक है। भारत को “डायबिटीज की राजधानी” भी कहा जाने लगा है, क्योंकि यहां मधुमेह रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अनियमित दिनचर्या, असंतुलित भोजन, मानसिक तनाव, शारीरिक श्रम की कमी, मोटापा तथा आनुवंशिक कारण इसके प्रमुख कारण हैं।
आयुर्वेद में मधुमेह को “प्रमेह” रोग के अंतर्गत वर्णित किया गया है। चरक, सुश्रुत तथा वाग्भट जैसे महान आयुर्वेदाचार्यों ने प्रमेह के कारण, लक्षण, उपचार और आहार-विहार का विस्तृत वर्णन किया है। आयुर्वेद के अनुसार केवल दवाओं से ही नहीं, बल्कि उचित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, प्राणायाम तथा मानसिक संतुलन के माध्यम से भी मधुमेह को नियंत्रित रखा जा सकता है। आयुर्वेद का सिद्धांत है-“आहार ही सर्वोत्तम औषधि है।”
आयुर्वेद में मधुमेह (प्रमेह) का स्वरूप
आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में कफ दोष, मेद धातु और क्लेद की अधिकता हो जाती है तथा अग्नि (पाचन शक्ति) मंद पड़ जाती है, तब प्रमेह रोग उत्पन्न होता है। लंबे समय तक अनुचित भोजन, अधिक मीठे पदार्थों का सेवन, दिन में सोना, व्यायाम का अभाव तथा मानसिक तनाव शरीर की चयापचय क्रिया को प्रभावित करते हैं, जिससे मधुमेह विकसित होता है।
प्रमेह के अनेक प्रकार बताए गए हैं, जिनमें मधुमेह सबसे गंभीर अवस्था मानी जाती है। आधुनिक विज्ञान में इसे ब्लड शुगर के असंतुलन के रूप में जाना जाता है, जबकि आयुर्वेद इसे संपूर्ण शरीर की विकृत चयापचय प्रक्रिया से जोड़कर देखता है।
मधुमेह में संतुलित आहार का महत्व
मधुमेह के उपचार में संतुलित आहार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि रोगी अपने भोजन को नियंत्रित कर ले, तो दवाओं की आवश्यकता कम हो सकती है तथा जटिलताओं से भी बचा जा सकता है। भोजन ऐसा होना चाहिए, जो सुपाच्य, पौष्टिक, रेशेयुक्त तथा कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला हो। एक साथ अधिक भोजन करने के बजाय दिन में चार से पांच बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन करना लाभकारी रहता है। इससे रक्त में शर्करा का स्तर अचानक नहीं बढ़ता और शरीर को निरंतर ऊर्जा मिलती रहती है।
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मधुमेह रोगी क्या खाएं
- मधुमेह रोगियों को अपने भोजन में साबुत अनाज, मोटे अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां तथा मौसमी कम मीठे फल शामिल करने चाहिए। गेहूं के साथ जौ, बाजरा, रागी, कोदो, ज्वार जैसे मोटे अनाज का प्रयोग अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इनमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है, जो रक्त में ग्लूकोज के अवशोषण की गति को धीमा
करता है।
- दालों में मूंग, मसूर तथा उड़द (सीमित मात्रा में) का सेवन शरीर को प्रोटीन प्रदान करता है। अंकुरित अनाज भी मधुमेह रोगियों के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं।
- हरी सब्जियों में करेला, लौकी, तोरी, परवल, पालक, मेथी, सहजन, टिंडा, पत्तागोभी तथा खीरा विशेष रूप से लाभकारी हैं। ये शरीर को विटामिन, खनिज और रेशा प्रदान करते हैं तथा रक्त शर्करा नियंत्रित रखने में सहायता करते हैं।
- फाइबर (रेशा) का महत्व- मधुमेह रोगियों के लिए भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होना आवश्यक है। रेशेदार भोजन पाचन को धीमा करता है, जिससे भोजन के बाद रक्त शर्करा तेजी से नहीं बढ़ती। सलाद, अंकुरित अनाज, इसबगोल, अलसी के बीज तथा हरी सब्जियां फाइबर के उत्कृष्ट स्रोत हैं।
-उपयुक्त तेल और वसा- तेल का प्रयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए। तिल का तेल, सरसों का तेल, मूंगफली का तेल अथवा घी की सीमित मात्रा लाभदायक हो सकती है। ट्रांस फैट, वनस्पति घी तथा बार-बार गर्म किए गए तेल का प्रयोग हानिकारक होता है।
कौन-कौन से पेय लाभकारी
मधुमेह रोगियों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना या सामान्य पानी पीना चाहिए। बिना चीनी का छाछ, मेथी का पानी, दालचीनी का हल्का काढ़ा, आंवला रस तथा करेला रस सीमित मात्रा में चिकित्सकीय सलाह अनुसार लिया जा सकता है। मीठे शीतल पेय, पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक तथा अधिक चीनी वाली चाय-कॉफी से बचना चाहिए।
इन खाद्य पदार्थों से करें परहेज
- मधुमेह रोगियों को चीनी, गुड़, मिठाइयां, केक, पेस्ट्री, चॉकलेट, आइसक्रीम तथा मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।
- मैदा से बने खाद्य पदार्थ जैसे पिज्जा, बर्गर, पास्ता, नूडल्स, सफेद ब्रेड तथा बेकरी उत्पाद सीमित अथवा बिल्कुल नहीं लेने चाहिए।
- तले हुए खाद्य पदार्थ, नमकीन, चिप्स, अधिक नमक, अचार, पापड़ तथा अत्यधिक तेलयुक्त भोजन से भी बचना चाहिए।
- धूम्रपान तथा शराब मधुमेह की जटिलताओं को बढ़ाते हैं, इसलिए इनका पूर्णतः त्याग करना चाहिए।
भोजन करने का सही तरीका
- भोजन हमेशा निश्चित समय पर करना चाहिए। नाश्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए। रात का भोजन हल्का रखें और सोने से कम से कम दो घंटे पहले कर लें।
- भोजन को अच्छी तरह चबाकर धीरे-धीरे खाना चाहिए। अधिक देर तक भूखे रहना तथा एक बार में अत्यधिक भोजन करना दोनों ही हानिकारक हैं।

व्यायाम और योग का महत्व
- केवल भोजन नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है। प्रतिदिन कम से कम 30–45 मिनट तेज चाल से चलना, योगासन तथा प्राणायाम करना अत्यंत आवश्यक है।
- मधुमेह रोगियों के लिए मंडूकासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन तथा ताड़ासन लाभकारी माने जाते हैं। प्राणायाम में अनुलोम-विलोम, भ्रामरी तथा कपालभाति (चिकित्सकीय सलाह के अनुसार) उपयोगी हो सकते हैं।
- भोजन के बाद लगभग 10-15 मिनट टहलना भी रक्त शर्करा नियंत्रण में सहायक होता है।
लाभकारी आयुर्वेदिक औषधीय पदार्थ
- आयुर्वेद में अनेक प्राकृतिक औषधियां वर्णित हैं, जो मधुमेह नियंत्रण में सहायक मानी जाती हैं।
- मेथी दाना में घुलनशील रेशा होता है, जो रक्त शर्करा नियंत्रित करने में मदद करता है।
- करेला अग्न्याशय की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।
- जामुन के बीज का चूर्ण पारंपरिक रूप से मधुमेह में उपयोग किया जाता है। यद्यपि आयुर्वेद की मौलिक सहिंताओं में इसका मधुमेह में उपयोग वर्णित नहीं है।
- गुड़मार (मेषश्रृंगी) मीठे स्वाद की अनुभूति कम करने तथा ग्लूकोज नियंत्रण में सहायक माना गया है।
- नीम की पत्तियां, आंवला, हल्दी, दालचीनी तथा गिलोय भी आयुर्वेद में उपयोगी मानी गई हैं। इनका सेवन किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।
आयुर्वेदिक दृष्टि से ऋतुचर्या का महत्व
मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव
तनाव, चिंता तथा अनिद्रा मधुमेह को बढ़ा सकते हैं। इसलिए सकारात्मक सोच, ध्यान, नियमित नींद तथा मानसिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। प्रतिदिन 7-8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद शरीर की हार्मोनल प्रणाली को संतुलित रखने में मदद करती है। मधुमेह की
संभावित जटिलताएं
यदि मधुमेह लंबे समय तक अनियंत्रित रहे, तो हृदय रोग, किडनी की समस्या, आंखों की रेटिनोपैथी, तंत्रिका क्षति, पैरों में घाव तथा संक्रमण जैसी गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए नियमित रूप से ब्लड शुगर, HbA1c, रक्तचाप, लिपिड प्रोफाइल तथा आंखों और पैरों की जांच कराना आवश्यक है।
आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाएं
आयुर्वेद केवल औषधि पर नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली पर बल देता है। समय पर उठना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित भोजन करना, समय पर सोना, मौसमी फल-सब्जियों का सेवन करना तथा प्रकृति के अनुरूप दिनचर्या अपनाना मधुमेह नियंत्रण में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है।
सामान्य सावधानियां-मधुमेह रोगी अपने चिकित्सक की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें। नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करते रहें। पैरों की विशेष देखभाल करें, आरामदायक जूते पहनें और किसी भी घाव को नजरअंदाज न करें। यात्रा के समय दवा, हल्का नाश्ता और पानी साथ रखें। किसी भी आयुर्वेदिक औषधि या घरेलू नुस्खे का उपयोग विशेषज्ञ चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही करें।
रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल समाज में मधुमेह जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियों की रोकथाम और उपचार के प्रति निरंतर जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान द्वारा समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, ब्लड शुगर जांच, आयुर्वेदिक परामर्श, पंचकर्म चिकित्सा, योग एवं प्राणायाम प्रशिक्षण, आहार परामर्श तथा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
संस्थान के अनुभवी आयुर्वेदाचार्य प्रत्येक रोगी की प्रकृति, दोषों की स्थिति एवं स्वास्थ्य अवस्था का मूल्यांकन कर व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करते हैं। औषधीय उपचार के साथ-साथ रोगियों को संतुलित आहार, दैनिक दिनचर्या, नियमित व्यायाम तथा तनाव प्रबंधन के बारे में भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाता है। संस्थान का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना और मधुमेह की जटिलताओं से बचाव सुनिश्चित करना है।
-रोहिलखंड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय बरेली, सेक्टर-7, रामगंगा नगर योजना, डोहरा रोड, बरेली, उत्तर प्रदेश +91 8077808309
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य-जागरूकता के लिए है। मधुमेह के उपचार, दवा में बदलाव या किसी आयुर्वेदिक औषधि के सेवन का निर्णय अपने चिकित्सक/योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
साभार- लोकदर्पण
