व्रत-त्योहार : सावन में मंगला गौरी व्रत का महत्व
सावन मास में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की आराधना का भी विशेष महत्व है। देवी गौरी को प्रसन्न करने के लिए प्रत्येक मंगलवार मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस सावन यह व्रत 4, 11, 18 और 25 अगस्त को पड़े रहा है। विशेष बात यह है कि 11 अगस्त को मासिक शिवरात्रि और 25 अगस्त को भौम प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है, जिससे शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा का विशेष फल प्राप्त होगा।
स्कंद पुराण के अनुसार मंगला गौरी व्रत से सौभाग्य, सुख-समृद्धि, दांपत्य जीवन में मधुरता तथा विवाह संबंधी बाधाओं और मंगल दोष से मुक्ति की मान्यता है। व्रत के दिन प्रातः स्नान कर संकल्प लें, माता मंगला गौरी की प्रतिमा स्थापित कर दीप, धूप, चंदन, पुष्प और नैवेद्य से पूजा करें। परंपरा के अनुसार 16 प्रकार की पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। अंत में व्रत कथा का श्रवण कर एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करें।
