नैन्सी ग्रेस: खगोल विज्ञान की अग्रदूत

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
On

विज्ञान के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं, जिनके योगदान से पूरी दुनिया का ज्ञान-विज्ञान नई दिशा प्राप्त करता है। नैन्सी ग्रेस रोमन ऐसी ही एक महान खगोलविद् थीं, जिन्हें आधुनिक अंतरिक्ष खगोल विज्ञान की अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने न केवल नासा में खगोल विज्ञान कार्यक्रमों की नींव रखी, बल्कि विश्व प्रसिद्ध हबल स्पेस टेलिस्कोप की परिकल्पना को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी कारण उन्हें ‘मदर ऑफ हबल’ कहा जाता है। उनके सम्मान में नासा ने अपनी अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष वेधशाला का नाम ‘नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप’ रखा है, जो उनके असाधारण वैज्ञानिक योगदान को श्रद्धांजलि है।

प्रारंभिक वैज्ञानिक कार्य- अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने विभिन्न अनुसंधान संस्थानों में कार्य किया। उन्होंने तारों की संरचना, उनकी रासायनिक संरचना तथा उनकी गति का अध्ययन किया। उनके शोध कार्यों ने तारकीय खगोल विज्ञान (स्टेलर एस्टोनॉमी) में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि उस समय महिलाओं को वैज्ञानिक संस्थानों में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। कई बार उन्हें केवल महिला होने के कारण अवसरों से वंचित किया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

नासा में प्रवेश-वर्ष 1959 में नैन्सी ग्रेस रोमन नासा में शामिल हुईं। यह वह समय था, जब अंतरिक्ष युग की शुरुआत हो रही थी। सोवियत संघ द्वारा स्पुतनिक उपग्रह के प्रक्षेपण के बाद अमेरिका अंतरिक्ष अनुसंधान में तेजी से आगे बढ़ रहा था। नासा में शामिल होने के बाद वे संस्था की पहली मुख्य खगोलविद् (चीफ ऑफ एस्टोनॉमी) बनीं। यह उपलब्धि अपने आप में ऐतिहासिक थी, क्योंकि उस समय विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के शीर्ष पदों पर महिलाओं की उपस्थिति अत्यंत दुर्लभ थी।

अंतरिक्ष खगोल विज्ञान की स्थापना- नैन्सी रोमन का सबसे बड़ा योगदान अंतरिक्ष आधारित खगोल विज्ञान को विकसित करना था। उस समय अधिकांश खगोलीय अध्ययन पृथ्वी पर स्थित दूरबीनों से किए जाते थे, लेकिन पृथ्वी का वायुमंडल तारों और आकाशगंगाओं से आने वाले प्रकाश को विकृत कर देता है। रोमन ने यह विचार प्रस्तुत किया कि यदि दूरबीनों को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाए, तो कहीं अधिक स्पष्ट और सटीक अवलोकन संभव होगा। उन्होंने नासा के भीतर इस विचार को लोकप्रिय बनाया और अंतरिक्ष दूरबीन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं का समर्थन प्राप्त किया।

हबल स्पेस टेलीस्कोप में योगदान- नैन्सी ग्रेस रोमन का सबसे प्रसिद्ध योगदान हबल स्पेस टेलीस्कोप के विकास में था। उन्होंने हबल परियोजना के लिए वैज्ञानिक समुदाय का समर्थन जुटाया। परियोजना की योजना और प्रारंभिक विकास में नेतृत्व प्रदान किया। सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित किया। अंतरिक्ष दूरबीन की आवश्यकता को प्रमाणित किया। इसी कारण नैन्सी रोमन को “मदर ऑफ हबल टेलिस्कोप” कहा जाता है। उनके वैज्ञानिक योगदान इस प्रकार से हैं-

अंतरिक्ष दूरबीन की आवश्यकता को पहचानना- 1950 के दशक में अधिकांश खगोलविद् पृथ्वी पर स्थित वेधशालाओं का उपयोग करते थे। उस समय अंतरिक्ष में दूरबीन स्थापित करने की अवधारणा नई और महंगी मानी जाती थी। नैन्सी रोमन ने प्रारंभिक चरण में ही यह समझ लिया था कि पृथ्वी का वायुमंडल खगोलीय अवलोकनों को सीमित करता है। अंतरिक्ष में स्थापित दूरबीन अधिक स्पष्ट और सटीक चित्र प्राप्त कर सकती है। पराबैंगनी, अवरक्त और अन्य विकिरणों का अध्ययन अंतरिक्ष से बेहतर ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि भविष्य का खगोल विज्ञान अंतरिक्ष आधारित वेधशालाओं पर निर्भर करेगा।

हबल की प्रमुख उपलब्धियां 

ब्रह्मांड की आयु का अधिक सटीक अनुमान।
डार्क एनर्जी की खोज में योगदान।
हजारों आकाशगंगाओं का अवलोकन।
ब्लैक होल के अस्तित्व के प्रमाण।
तारों और ग्रहों के निर्माण का अध्ययन।

इन उपलब्धियों ने सिद्ध कर दिया कि नैन्सी रोमन की दूरदृष्टि सही थी।

सम्मान और पुरस्कार

अपने वैज्ञानिक योगदान के लिए उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हुए।

नासा विशिष्ट वैज्ञानिक उपलब्धि पदक 
संघीय महिला सम्मान पुरस्कार 
एयरोस्पेस क्षेत्र में महिलाओं के लिए आजीवन उपलब्धि पुरस्कार 
अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा मानद उपाधियां।

वैज्ञानिक समुदाय को एकजुट करना

हबल स्पेस टेलीस्कोप जैसी परियोजना के लिए केवल तकनीक ही पर्याप्त नहीं थी, इसके लिए व्यापक वैज्ञानिक समर्थन भी आवश्यक था। नैन्सी रोमन ने अमेरिका के प्रमुख खगोलविदों से संवाद स्थापित किया। विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों को परियोजना से जोड़ा। विभिन्न वैज्ञानिक समितियों का गठन कराया। अंतरिक्ष दूरबीन की वैज्ञानिक उपयोगिता को स्पष्ट किया। 

हबल परियोजना की योजना में योगदान

नैन्सी रोमन ने हबल स्पेस टेलीस्कोप की प्रारंभिक वैज्ञानिक रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सुझाव दिया कि दूरबीन कि उच्च विभेदन वाली हो। पृथ्वी के वायुमंडलीय प्रभाव से मुक्त होकर कार्य करे। विभिन्न तरंगदैर्ध्यों का अध्ययन कर सके। विश्वभर के वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध हो। इन सिद्धांतों ने बाद में हबल की वैज्ञानिक सफलता की नींव रखी।

खगोल विज्ञान की संस्कृति का निर्माण

नैन्सी रोमन ने केवल एक दूरबीन परियोजना का समर्थन नहीं किया, बल्कि उन्होंने अंतरिक्ष खगोल विज्ञान की एक नई संस्कृति विकसित की। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि अंतरिक्ष वेधशालाएं वैज्ञानिक अनुसंधान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनें। डेटा विश्वभर के वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध हो। युवा वैज्ञानिकों को नए अवसर प्राप्त हों। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिले। आज अंतरिक्ष आधारित खगोल विज्ञान जिस स्तर पर है, उसकी नींव रोमन द्वारा रखी गई नीतियों में देखी जा सकती है। हबल की सफलता और रोमन की दूरदृष्टि 24 अप्रैल 1990 को हबल स्पेस टेलीस्कोप का प्रक्षेपण हुआ। प्रारंभिक तकनीकी समस्याओं के बावजूद बाद में यह मानव इतिहास की सबसे सफल वैज्ञानिक वेधशालाओं में से एक बन गया।

रूफिया खान, शिक्षिका