शिक्षकों के तबादले पर हाईकोर्ट सख्त! दूरस्थ स्कूल खाली हुए तो कैसे चलेगी पढ़ाई? सरकार से मांगा जवाब
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों के मध्य सत्र में सुगम क्षेत्रों में तबादले के मामले में राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने सरकार को समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय की है।
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वार्षिक तबादला के नाम पर मध्य सत्र में दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के सुगम क्षेत्रों में प्रस्तावित तबादलों के मामले में राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए है। मामले की अगली सुनवाई आगामी सात सितंबर को होगी।
इस मामले को अल्मोड़ा के सल्ट तहसील के डाभर गांव निवासी जीवन सिंह की ओर से चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने इस प्रकरण पर सोमवार को सुनवाई की लेकिन आदेश की प्रति मंगलवार को उपलब्ध हुई।
वार्षिक तबादला अधिनियम का दिया हवाला
याचिकाकर्ता का कहना था कि बड़ी संख्या में दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों ने सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरण के लिए अपने विकल्प प्रस्तुत किए हैं। अदालत के पूर्व आदेश के तहत विभाग को उत्तराखंड वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 17(1)(बी) के तहत शिक्षकों के अनुरोध के आधार पर तबादले करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।
सरकार ने मांगा समय, 7 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि यदि दूरस्थ क्षेत्रों से शिक्षकों का स्थानांतरण किया जाता है और उनके स्थान पर रिक्त पदों को भरने के लिए पारस्परिक अथवा वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तो इन क्षेत्रों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। राज्य सरकार की ओर से आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए खंडपीठ से समय मांगा गया। खंडपीठ ने मांग को स्वीकार कर लिया और अगली सुनवाई के लिए आगामी सात सितंबर की तय कर दी।
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