Raksha Bandhan 2026: लाल, पीली या केसरिया… किस रंग की राखी बांधना माना जाता है शुभ? जानें धार्मिक महत्व
रक्षाबंधन पर राखी के रंग को लेकर भी कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं प्रचलित हैं। लाल, पीला और केसरिया रंग शुभता, प्रेम, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़े माने जाते हैं।
लखनऊः भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं, ताकि उसकी सुख-समृद्धि और लंबे जीवन की कामना कर सकें। इस त्योहार के आस-पास बाजारों में विभिन्न रंगों और डिज़ाइनों की राखियों की भरमार हो जाती है। इनमें विशेषकर लाल, पीला और केसरिया रंग की राखियों की मांग अधिक होती है, जिनका धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता में शुभता और सकारात्मकता से जुड़ाव होता है।
लाल रंग की राखी को क्यों माना जाता है खास?
भारतीय संस्कृति में लाल रंग को प्रेम, शक्ति, उत्साह और मंगल का प्रतीक माना जाता है। पूजा-पाठ में भी रोली और सिंदूर जैसी सामग्रियों में लाल का उपयोग किया जाता है। इसी कारण रक्षाबंधन पर लाल राखी को भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और मजबूती का प्रतीक माना जाता है।
पीली राखी का क्या है धार्मिक महत्व?
पीला रंग ज्ञान, शुभता और समृद्धि का प्रतीक है।धि से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में भगवान विष्णु के पीले वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। पूजा में हल्दी और पीले रंग की वस्तुओं का इस्तेमाल भी शुभ माना जाता है। ऐसे में पीली राखी को भाई के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना से जोड़कर देखा जाता है।
केसरिया रंग की राखी क्यों होती है शुभ?
केसरिया रंग त्याग, साहस, ऊर्जा और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है। भारतीय संस्कृति में इस रंग का विशेष महत्व है। रक्षाबंधन पर केसरिया रंग की राखी बांधने को भाई के जीवन में शक्ति, सकारात्मकता और साहस की कामना से जोड़ा जाता है।
कब है राखी बांधने का शुभ समय?
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से शुरू होकर 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। वहीं, राखी बांधने के लिए 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय बताया गया है।
यह भी पढ़ेंः Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को ही क्यों मनाया जाएगा रक्षाबंधन? जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
नोट: राखी बांधने का मुहूर्त स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
