Kanpur News : गरीब छात्रा ने बांधी राखी, DM जितेंद्र प्रताप ने फीस भर दिलाई साइकिल, दरियादिली जीत लेगी दिल
बर्तन मांजने वाली की बेटी को DM ने दिया रक्षाबंधन का तोहफा, आधी फीस की माफ, बाकी खुद भरी
कानपुर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह को राखी बांधने पहुंची गरीब छात्रा की फीस उन्होंने अपनी जेब से भर दी। साथ ही स्कूल जाने के लिए नई साइकिल भी दिलाई।
कानपुर, अमृत विचार। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कानपुर से एक बेहद भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है। यहां एक गरीब छात्रा अपनी मां के साथ जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह को राखी बांधने पहुंची थी। छात्रा की परेशानी सुनकर डीएम साहब का दिल पसीज गया और उन्होंने न सिर्फ एक भाई, बल्कि पिता का फर्ज निभाते हुए एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है।
पिता का साया उठा, बर्तन मांजकर घर चलाती हैं मां
कानपुर के हंसपुरम की रहने वाली छात्रा ईशू कक्षा 12वीं की छात्रा है। ईशू के सिर से पिता प्रागीलाल यादव का साया साल 2017 में ही उठ चुका था। घर में कोई ऐसा सदस्य नहीं है जो उसकी पढ़ाई का खर्च उठा सके। भाई मदद नहीं करते। उसकी मां ललिता देवी दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर किसी तरह परिवार का पेट पालती हैं।
DM ने आधी फीस कराई माफ, आधी खुद अपनी जेब से भरी
जब ईशू अपनी मां के साथ डीएम को राखी बांधने पहुंची, तो उन्होंने छात्रा से उसके घर-परिवार और पढ़ाई के बारे में पूछा। इस पर मां ललिता देवी ने बताया कि बेटी की 6 महीने से फीस जमा नहीं है और स्कूल ने 29,000 रुपये की फीस स्लिप भेजी है।
छात्रा कुछ बोल नहीं रही थी, बस इतना कहा- "सर, मैं पढ़ना चाहती हूं।" यह सुनते ही डीएम ने तुरंत स्कूल के प्रधानाचार्य से फोन पर बात की। उन्होंने आधी फीस स्कूल की तरफ से माफ करवाई और बाकी की आधी फीस खुद अपनी जेब से जमा कर दी।
पैदल स्कूल जाने की बात सुनी तो दिला दी नई साइकिल
जब ईशू जाने लगी, तो डीएम ने प्यार से पूछा कि स्कूल कितनी दूर है और तुम कैसे जाती हो? बच्ची ने मासूमियत से जवाब दिया कि किराए के पैसे नहीं होते, इसलिए वह पैदल ही स्कूल चली जाती है। बच्ची के इस हौसले को देखकर डीएम ने तुरंत अपनी जेब से पैसे देकर उसके लिए एक नई साइकिल मंगवा दी। साथ ही कहा- "जब भी कोई जरूरत हो, मैं कहीं भी रहूं, मुझसे बात करके अपनी परेशानी बता सकती हो।"
'अब मैं कुछ बनकर दिखाऊंगी'
डीएम की इस दरियादिली से अभिभूत ईशू ने कहा, "मैंने सोचा था कि हमारे डीएम साहब लोगों की मदद करते हैं, तो उन्हें ही अपना भाई बना लेती हूं। मुझे एहसास नहीं था कि वो भाई के साथ पिता का भी फर्ज निभा देंगे। अब मैं भी पढ़-लिखकर कुछ बनकर दिखाऊंगी।"
वहीं, डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि जब बच्ची राखी बांध रही थी, तो उसकी मासूमियत और परेशानी देखकर उन्हें उसमें अपने बच्चे नजर आ गए।
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