लखनऊ के इस इलाके में बदलने वाली है तस्वीर! 30 एकड़ में बनेगा सस्टेनेबिलिटी पार्क

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Edited By Muskan Dixit
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बारिश के पानी से लेकर हरियाली तक का होगा इंतजाम

एलडीए विकसित करेगा जैव विविधता और हरित क्षेत्र आधारित पार्क, सोलर लाइटिंग से लेकर रेनवाटर हार्वेस्टिंग तक होंगी आधुनिक सुविधाएं

लखनऊ, अमृत विचार : लखनऊ में तेजी से होती शहरी विस्तार और बढ़ती आबादी को देखते हुए एलडीए सुल्तानपुर रोड स्थित वेलनेस सिटी के 30 एकड़ में सस्टेनेबिलिटी पार्क एवं फ्लड पंपिंग स्टेशन बनाएगा। इन परियोजनाओं से जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान होने के साथ हरित क्षेत्र, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए ) 485 हेक्टेयर में वेलनेस सिटी आवासीय योजना विकसित कर रहा है। भविष्य में इसके आसपास जनसंख्या का घनत्व बढ़ेगा और निजी बिल्डरों की टाउनशिप भी तेजी से विकसित होंगी। इससे क्षेत्र में जलभराव की समस्या उत्पन्न होगी और यातायात बाधित होगा। संपत्तियों को भी नुकसान होगा। पहले से इन समस्या को देखते हुए एलडीए फ्लड पंपिंग स्टेशन बनाएगा। साथ ही इकाना स्टेडियम के पास वेलनेस सिटी के 30 एकड़ में सस्टेनेबिलिटी पार्क भी विकसित करेगा। ये पार्क सीजी सिटी के पास पहले से बने 37 एकड़ के वेटलेंड से जोड़ा जाएगा।

सस्टेनेबिलिटी पार्क को आमतौर पर सतत विकास पार्क कहते हैं। इसे विशेष हरित क्षेत्र में विकसित किया जाता है, जो पर्यावरण की रक्षा, ऊर्जा की बचत और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। एलडीए ने परियोजना का खाका तैयार कर लिया जो बोर्ड बैठक में स्वीकृत होते ही धरातल पर काम शुरू कर देगा।

पार्क में देशज प्रजाति पर आधारित लगाए जाएंगे पेड़-पौधे

सस्टेनेबिलिटी पार्क में जैव विविधता पार्क व देशज प्रजातियों पर आधारित पेड़-पौधे लगाकर विकसित किया जाएगा। देशज प्रजाति में वे जीव-जंतु या पेड़-पौधे होते हैं जो किसी विशेष प्राकृतिक क्षेत्र या आवास में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। इसके अलावा वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक जल पुनर्भरण प्रणाली व इको फ्रेंडली वॉकवे जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन भी

परिसर में सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर काम होगा। कंपोस्टिंग एवं रीसाइक्लिंग सुविधाओं शामिल की जाएंगी। साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए प्राकृतिक रिटेंशन बेसिन एवं बायो-स्वेल यानी प्राकृतिक और वैज्ञानिक जल निकासी प्रणाली का निर्माण किया जाएगा।

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