Rampur News : कैबिनेट से मंजूरी को चार साल बीते, धरातल पर नहीं उतरा मेडिकल कॉलेज
500 बेड के मेडिकल कॉलेज को 2 सितंबर 2021 में कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी
यूपी कैबिनेट से मंजूरी मिलने के 4 साल बाद भी रामपुर में 500 बेड का मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं हो सका है। व्यापारी नेताओं ने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मुलाकात कर इसे जल्द शुरू कराने की मांग की है।
रामपुर, अमृत विचार। उप्र कैबिनेट से मंजूरी को चार साल बीतने के बावजूद रामपुर मेडिकल कॉलेज धरातल पर नहीं उतरा है। 500 बेड के मेडिकल कॉलेज को 2 सितंबर 2021 को उप्र कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। बुधवार आज दो सितंबर को कैबिनेट मंजूरी को पूरे चार साल हो गए हैं। (पीपीपी मॉडल) पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर कैबिनेट में प्रस्ताव पास हुआ था।
मंगलवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप सोनी के नेतृत्व में व्यापारी नेता उप्र उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक से मिले और मामले में ज्ञापन सौंपा। स्वास्थ्य मंत्री ने 2027 में मेडिकल कॉलेज शुरू कराए जाने का आश्वासन दिया है। संदीप सोनी ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी रामपुर को भी मामले में निर्देश जारी किए हैं। जिससे उम्मीद जगी है। योजना के तहत जिला अस्पताल परिसर को उच्चीकृत करके 500 बेड का अस्पताल और ओपीडी शुरू की जानी है। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद भी निवेशकों या निवेशकों की रुचि न होने के कारण यह प्रोजेक्ट लंबे समय से अटका हुआ है, जिसे लेकर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत संगठन के पदाधिकारी लगातार मांग उठा रहे हैं।
पूर्व सांसद घनश्याम सिंह लोधी ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर मेडिकल कालेज खुलवाने का अनुरोध किया था। पीपीपी मॉडल पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप पर मेडिकल कॉलेज के संबंध में चिकित्सा शिक्षा अनुभाग के विशेष सचिव दुर्गा प्रसाद नागपाल ने पूर्व सांसद पत्र लिखकर रामपुर में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की जानकारी दी थी। रामपुर तहसील के राजस्व ग्राम अलीनगर बेनजीर व जगतपुर की गाटा संख्या 481 व गाटा संख्या-122क कुल रकबा 2.025 हेक्टेयर भूमि मेडिकल कॉलेज के नाम में दर्ज भी है।
भूमि हस्तांतरित की समस्या दूर करने की मांग
व्यापारियों ने मेडिकल कॉलेज में आ रही भूमि हस्तांतरण की समस्या को दूर करने की मांग की है। उप मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई भी करा दी जाएगी। व्यापारियों ने बताया कि पीपीपी मॉडल पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए 100 बीघा भूमि ग्राम जगतपुर व ग्राम बेनजीर की अधिग्रहण की गई है। मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हो चुका है लेकिन भूमि अधिग्रहण कार्यवाही पूर्ण न होने से मेडिकल कॉलेज पूर्ण रूप से शुरू नहीं हो पा रहा है।
मेडिकल कॉलेज शुरू न होने से जिले में समस्त व्यापारी व आम जनता परेशान है। जिला अस्पताल से मरीजों को मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। भूमि हस्तांतरण में देरी का खामियाजा जिले की जनता भुगत रही है। जबकि व्यापार मंडल द्वारा लंबे प्रयास के बाद स्वीकृत कराई गई एमआरआई मशीन जिला अस्पताल में धूल फांक रही है क्योंकि उसको चलाने वाला कोई नहीं है। जिला अस्पताल में हार्ट, लिवर, किडनी, न्यूरो, आंख नाक कान गला, जनरल फिजिशियन आदि डॉक्टरों की कमी है जिसके कारण मरीजों को परेशानी हो रही है।
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