Raebareli Janmashtami: कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, बारिश के बीच सजे मंदिर और झांकियां; आधी रात गूंजेगा ‘नंद के घर आनंद भयो’

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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चार सितंबर की मध्यरात्रि जन्मेंगे कान्हा, शहर से गांव तक तैयारियां तेज; पुलिस लाइन समेत कई स्थानों पर भव्य सजावट और झांकियों की तैयारी

रायबरेली, अमृत विचार। कई दिनों से आसमान में छाए काले बादलों और रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच रायबरेली में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। श्रीकृष्ण के आगमन को लेकर शहर से लेकर गांव तक उत्साह का माहौल है। कहीं रंग-बिरंगी विद्युत झालरों और भव्य पांडालों से परिसर सजाए जा रहे हैं तो कहीं बाल गोपाल की मनमोहक झांकियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं को उस आधी रात का इंतजार है, जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ‘नंद के घर आनंद भयो’ के जयघोष से वातावरण गूंज उठेगा।

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शहर से गांव तक कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां तेज

शहर के साथ तहसील कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी जन्माष्टमी को लेकर खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। पुलिस लाइन परिसर, विकास नगर, जलकल परिसर, दमकल परिसर, राजकीय कालोनी और शुभाशीष संस्थान देवानंदपुर समेत कई स्थानों पर सजावट और झांकियों को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है।

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लालगंज, सलोन, महराजगंज, शिवगढ़, बछरावां, ऊंचाहार, परशदेपुर, डीह, हरचंदपुर, गंगागंज, डलमऊ, घुरवारा, जगतपुर, अमावां और खीरों सहित ग्रामीण इलाकों में भी कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। गांवों में घर-घर कान्हा के स्वागत की तैयारी है, जबकि मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां की जा रही हैं।

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बाजारों में भी दिखने लगी जन्माष्टमी की रौनक

जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। कान्हा के नन्हे वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। बच्चों को लड्डू गोपाल के रूप में सजाने के लिए अभिभावक खास तौर पर सामग्री खरीद रहे हैं।

श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार बाल गोपाल के लिए वस्त्र, आभूषण और श्रृंगार की सामग्री खरीद रहे हैं। इससे बाजार में भी जन्माष्टमी का उत्सवी रंग दिखाई देने लगा है।

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आधी रात गूंजेगा श्रीकृष्ण जन्म का जयघोष

चार सितंबर की मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही पूरा जनपद भक्तिमय हो जाएगा। मंदिरों और सजे हुए परिसरों में घंटे-घड़ियाल बजेंगे, शंखनाद होगा और भक्तों के जयकारों से वातावरण गूंज उठेगा।

पुलिस लाइन परिसर में जवाबी कीर्तन के साथ भव्य झांकी का आयोजन किया जाएगा। इसमें हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां की हैं।

गुरुवार से ही शहर की गलियों और बाजारों में ‘राधे-राधे’ और ‘हरे कृष्णा-हरे कृष्णा’ जैसे जयघोष सुनाई देने लगे हैं। बारिश के बीच भी रायबरेली में कृष्ण जन्मोत्सव का उत्साह कम नहीं हुआ है।

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बारिश के बीच भी आस्था अडिग

कई दिनों से घने बादलों और रुक-रुककर हो रही बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। जन्मोत्सव को यादगार बनाने के लिए लोग सजावट, झांकियों और पूजन सामग्री की तैयारियों में जुटे हैं।

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मंदिरों और झांकियों को अंतिम रूप देने में युवा, बच्चे और महिलाएं भी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि कृष्ण जन्मोत्सव केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि घर-घर प्रेम, भक्ति और उल्लास का संदेश देने वाला अवसर भी है।

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निशीथ काल में होगा कान्हा का जन्मोत्सव
पंडित सोनू तिवारी
पंडित सोनू तिवारी

पंडित सोनू तिवारी ने बताया कि पंचांग के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस वर्ष शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग के कारण इस बार की जन्माष्टमी को विशेष माना जा रहा है।

पं. सोनू तिवारी ने बताया कि पंचांग गणना के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर की सुबह 2:25 बजे शुरू होकर  रात 12:13 बजे समाप्त होगी। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ माना जाता है। इसी कारण जन्माष्टमी पर निशीथ काल की पूजा का विशेष महत्व है। इस वर्ष निशीथ काल में पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। 

जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करेंगे। घरों और मंदिरों में बाल गोपाल को झूले में विराजमान कर विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय घंटा-घड़ियाल बजाकर आरती की जाएगी और माखन-मिश्री, पंचामृत, फल व अन्य प्रसाद अर्पित किए जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म अत्याचार और अधर्म के अंत तथा धर्म की स्थापना के संदेश का प्रतीक है।

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