कानपुर में पांडु नदी का कहर : 300 मकान जलमग्न, 25 परिवार फंसे; NDRF ने संभाला मोर्चा
पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से कानपुर के निचले इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। करीब 300 मकान जलमग्न हो चुके हैं और 150 से अधिक परिवार सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। जलभराव में फंसे 25 से अधिक परिवारों के बचाव के लिए NDRF ने मोर्चा संभाल लिया है।
कानपुर, अमृत विचार। पांडु नदी का जलस्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है और नदी का पानी अपनी उफान पर है, जिसकी वजह से शहर के निचले इलाकों में रहने वाले एक दर्जन क्षेत्र के हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। 150 से अधिक परिवार बस्तियों को छोड़कर जा चुके हैं, जबकि जलभराव में फंसे 25 से अधिक परिवारों को बचाने के लिए गुरुवार को एनडीआरएफ भी मैदान में उतर आई और बचाव कार्य शुरू किया।
पांडु नदी का पानी बढ़ने से गुरुवार को गोपालपुरम और जरौली फेज-2 के निचले इलाकों में जलभराव हो गया। 25 से अधिक परिवारों के पानी के बीच में फंसे होने की सूचना पर गुरुवार को एनडीआरएफ को बुलाया गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया है। प्रशासन की टीमें भी प्रभावित इलाकों में मुस्तैद की गई। वहीं, ग्राम पनका बहादुर नगर में भौती-पनका संपर्क मार्ग के पुल के ऊपर से पांडु नदी का पानी बहने लगा हैं, जिससे सड़कें जलमगन हो गई। आसपास का क्षेत्र प्रभावित भी पानी-पानी होने लगा। कई मकान पानी में डूबने की जद में अब आने वाले हैं।
प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए पुल पर बैरिकेडिंग कराकर आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया। साथ ही स्थानीय पुलिस को मौके पर सतर्क रहने और पुल से आवागमन प्रतिबंधित रखने के निर्देश दिए हैं। पुल पर बैरिकेडिंग कर दी गई है, ताकि कोई भी भारी वाहन न गुजर सके। वहीं, इससे पहले बुधवार देर रात संयुक्त मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर अनुभव सिंह और तहसीलदार सदर विनय द्विवेदी ने पांडु नदी के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। दोनों अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। प्रभावितों के लिए राहत किट की व्यवस्था भी कराई।
यूपी एससी-एसटी आयोग सदस्य पहुंचे बस्ती
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र कुंडे ने गुरुवार को मायापुरम और रविदासपुरम के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का निस्तारण किए जाने की मांग की। साथ ही जलभराव वाले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षा के दृष्टिगत बाढ़ आश्रय स्थल श्री विशम्भर नाथ ठाकुर इंटर कॉलेज में पहुंचने के लिए प्रेरित किया। इस अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ आश्रय स्थल पर प्रभावितों के लिए कम्युनिटी किचन का संचालन शुरू कर दिया गया है, जहां रोजाना लगभग 400 लोग भोजन कर रहे हैं। प्रशासन पांडु नदी के जलस्तर और प्रभावित इलाकों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।
गृहस्थी का सामान निकलना शुरू
पांडु नदी बाढ़ का पानी घरों में घुसने की वजह से लोगों की गृहस्थी व इलेक्ट्रॉनिक सामान भी काफी प्रभावित हो गया है, जिसको बचाने के लिए क्षेत्र के लोग एक-दूसरे की मदद को जुट गए है, ताकि उनकी गृहस्थी व हजारों रुपये का सामान पानी से बर्बाद न हो सके। गुरुवार को कई लोगों ने बेड, अलमारी, फ्रिज, टीवी आदि को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखा।
300 मकान जलमगन, विस्थापन केंद्र में नहीं जा रहे लोग
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय व एसडीएम सदर अभिनव सिंह ने पांडु नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर रविदास पुरम व मायापुरी आदि क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। मौके पर उन्हें लगभग 300 मकान जलमग्न मिले।
जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किए जाने की आवश्यक व्यवस्था की गई है, लेकिन क्षेत्रीय निवासियों द्वारा विस्थापन केंद्र में जाने से स्पष्ट रूप से इंकार किए जाने के कारण वर्तमान में उन्हें उनके क्षेत्र में ही आवश्यक खाद्यान्न, साफ-सफाई एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल व नियमित फॉगिंग और विशेष साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए। वहीं, नगर आयुक्त ने क्षेत्रीय पार्षद से अपेक्षा की है कि वह प्रभावित नागरिकों से संवाद कर उन्हें सुरक्षित राहत केंद्र में विस्थापित होने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या जनहानि की संभावना को पूरी तरह टाला जा सके।
अस्थायी राहत केंद्र में मिला अंधेरा
नगर आयुक्त ने जब बर्रा विश्व बैंक स्थित कंपोजिट विद्यालय में स्थापित अस्थायी राहत केंद्र का निरीक्षण किया तो उन्हें राहत केंद्र में विद्युत प्रकाश की व्यवस्था उपलब्ध न होने के कारण अंधेरा पाया गया। इसपर उन्होंने मार्ग प्रकाश विभाग को तत्काल प्रभाव से निर्देश दिया कि तत्काल प्रभाव से गुरुवार रात में ही राहत केंद्र में आवश्यक प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए, जिससे राहत केंद्र में ठहरे प्रभावित नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। किसी भी स्तर पर कमी पाए जाने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराते हुए व्यवस्थाओं को मानक के अनुरूप बेहतर किया जाए।
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