अजनार की सूरत बदलने वाले सुरेद्र को मिला नीदरलैंड से नौकरी का ऑफर, सोशल मीडिया पर क्यों छाए ‘बिट्टू तबाही’?

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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अमृत विचार डेस्क : कहते है कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है। और इस कहावत को सच कर दिखाया है, मध्य प्रदेश के बिटटू तबाही नाम से सोशल मीडिया पर फेमस सुरेद्र सिंह चौधरी, जिन्होने अपने गांव में बहने वाली अजनार नदी की सूरत ही बदल के रख दी। कुछ समय पहले जो बदबू और गंदगी का पर्याय बनी थी। आज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी है।   

क्या है पूरा मामला 

एमपी के ब्यावरा में बहने वाली अजनार नदी बदबू और गंदगी के कारण जहां एक ओर लोग इसे नजरअंदाज कर चुके थे। तो वही दुसरी ओर सोशल मीडिया पर 'बिट्टू तबाही' के नाम से पहचाने जाने वाले 20 वर्षीय बीएससी छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी ने उस नदी को साफ करने का सकंल्प लिया। 

इतना ही नहीं बिना किसी बजट या भारी मशीनरी के केवल एक फावड़ा लेकर नदी की सफाई का बीड़ा उठाया। कई लोगों ने उन्हें हस के कहां कि वो इस काम को नहीं कर पाएगें। लेकिन सुरेद्र के द्रढ संकल्प के आगे आखिरकार नदी साफ हो गई। बिट्टू तबाही ने इस साल 26 जनवरी को अजनार नदी को उसका पुराना और स्वच्छ रूप लौटाने का संकल्प लिया। 

युवक के दृढ़ संकल्प से साफ 

वह रोज सुबह नदी में उतरते और घंटों पानी में रहकर हाथों से कचरा निकालते रहे। करीब तीन महीने की मेहनत के बाद नदी की तस्वीर बदल गई। अब यहां कचरे की जगह साफ पानी नजर आता है। शुरुआत में कुछ दोस्त भी उनके साथ आए, लेकिन मुश्किल और थकाऊ काम के कारण धीरे-धीरे वें सभी पीछे हट गए। इसके बाद बिट्टू ने अकेले ही सफाई जारी रखी। 

अपने कैंपेन के बारे में बात करते हुए, सुरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया, "यह नदी हमारे शहर ब्यावरा के ठीक बीच से बहती है; मैं अभी उसी नदी की सफाई कर रहा हूं... मैं काफी समय से नदी के ठीक पीछे बने एक मंदिर में जा रहा था। जब भी मैं वहां जाता, तो देखता कि लोग बदबू और बहुत सारी गंदगी की वजह से दूर हो जाते थे। तभी मेरे मन में यह ख्याल आया। शुरू में, मैंने कचरा और मलबा साफ करने के लिए एक मशीन बनाने के बारे में सोचा। लेकिन मेरे पास ऐसी मशीन बनाने का बजट नहीं था। फिर, जब 26 जनवरी आई, तो मुझे लगा कि यह कुछ काम का करने का अच्छा दिन है... तब से, मैं रुका नहीं और लगातार लगा रहा हूं... मुझे सभी का सहयोग मिला... मैंने अकेले शुरुआत की; उन्होंने (नगर निगम) देखा कि मैं क्या कर रहा हूं और फिर अपना समर्थन दिया

मेहनत और पैसा दोनों तरह से दिया  

बिट्टू ने सफाई में अपना समय और मेहनत लगाने के साथ पैसे भी खर्च किए। नदी के गहरे हिस्सों से भारी कचरा निकालने के लिए उन्होंने अपनी जेब से रुपए खर्च कर जेसीबी मशीन लगवाई। 

तबियत खराब हुई फिर भी नहीं रूके 

पहले बिना किसी उपकरण के सुरेद्र सफाई के काम को करते थे। फिर उन्होने जरूरी मशीनरी का इस्तेमाल कर सफाई की। इस दौरान उन्हें हाथ-पैर में सक्रमण जैसी दिक्कतें हुई। उनका सामना जहरीले सांपो से भी हुआ। बावजूद इसके उन्होंने सफाई करना नहीं छोडा। और अपने इस अभियान को पूरा किया।

सूरेद्र की इस मेहनत को देखकर ब्यावरा नगर पालिका ने जेसीबी और पोकलेन मशाीनों की मदद से नदी मे जमा कचरे की सफाई और मलबा हटाया। नगर पालिका के सब इंजीनियर के मुताबिक, नदी में पांच बडें नालों का पानी गिरता है, जिसके चलते गंदगी और बदबू होती है, इसे रोकने के लिए 1477 करोड लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

विदेश मे काम करने का मौका 

सुरेद्र की इस मुहिम की चर्चा का विषय बनी है वह एमपी के सीएम मोहन यादव से मिल चुके है, और इनके इस काम की सराहना भी की।

इतना ही नहीं उनके इस काम की चर्चा विदेश तक की जा रही है। उन्हें द ओशन क्लीनअप के डच CEO बोयान स्लैट ने नौकरी का ऑफर दिया, और कहा, "आओ हमारे लिए काम करो"

 

 

 

 

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