हादसे के सबक

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Edited By Amrit Vichar
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गाजियाबाद के मुरादनगर में श्मशान घाट परिसर की छत गिरने से हुआ हादसा दु:खद तो है ही, ऐसी दुर्घटनाएं आगे न होने पाएं, इसके लिए भी एक सबक है। गाजियाबाद के हादसे में कई लोगों की जान चली गई। कई लोग घायल हुए हैं। उनमें से कई की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री ने मुआवजा का …

गाजियाबाद के मुरादनगर में श्मशान घाट परिसर की छत गिरने से हुआ हादसा दु:खद तो है ही, ऐसी दुर्घटनाएं आगे न होने पाएं, इसके लिए भी एक सबक है। गाजियाबाद के हादसे में कई लोगों की जान चली गई। कई लोग घायल हुए हैं।

उनमें से कई की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री ने मुआवजा का ऐलान किया है और घटना के कारण की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। फौरी कार्रवाई के तौर पर नगर पालिका की ईओ, जेई, सुपरवाइजर और ठेकेदार पर गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। तीन अधिकारी गिरफ्तार भी कर लिए गए।

ऐसे हादसे पहले भी हुए हैं। हम कुछ दिन तो उनसे सबक लेते हैं लेकिन फिर भुला देते हैं। नतीजतन, कुछ ही वक्त गुजरता है फिर कहीं-न-कहीं हादसे हो जाते हैं। दरअसल, इस हादसे के लिए असल कसूरवार सिस्टम की वे खामियां हैं जिनको दूर करना बड़ा दुरुह कार्य है।

सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार का घुन इस कदर लगा हुआ है कि बिना कमीशन कोई कार्य नहीं किया जाता। यह सब जानते हैं कि कमीशन का यह खेल नीचे से लेकर ऊपर तक है।

नतीजतन, ठेकेदार इतनी घटिया सामग्री का प्रयोग करता है कि कोई भी निर्माण कार्य बहुत दिन नहीं चल पाता। गाजियाबाद के हादसे में सामने आया है कि मुरादनगर के श्मशान घाट परिसर में ढाई माह पहले ही गैलरी का निर्माण नगर पालिका की ओर से कराया गया था। उसमें घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जो हादसे का प्रमुख कारण बना।

सच यह है कि भ्रष्टाचार से अपनी-अपनी जेबें भरने के लिए सरकारी तंत्र किस हद तक लोगों की जानों से खिलवाड़ कर सकता है। यह हादसा इस असंवेदनहीनता और अमानवीयता का उदाहरण है। प्रदेश में और भी जिलों में निकायों की ओर से ऐसे निर्माण कार्य कराए गए हैं। उनको भी देखा जाना चाहिए कि कहीं वे अधोमानक भवन और लोगों की मौत का कारण न बन जाएं।

अब जब हादसा हो गया है तो भले ही कई अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदार पर कानूनी कार्रवाई कर दी जाए लेकिन क्या उन परिवारों को हुई क्षति की भरपाई की जा सकती है, जिन्होंने इस हादसे में अपनों को खोया है? नहीं, इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस हादसे को सबक के रूप में लेते हुए ऐसे कदम जरूर उठाए कि सरकारी तंत्र में घुसपैठ बनाए बैठे भ्रष्टाचार के घुन को निकाल सके, तभी आगे निर्दोष लोगों की जान बच सकती है।