अनुचित सवाल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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अपने देश में कोरोना की दो वैक्सीन को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिलने के बाद से सियासत और बयानबाजी तेज हो गई है। सबसे पहले इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आपत्तिजनक बयान दिया। हालांकि जब वह अपने बयान पर घिरने लगे तो वैज्ञानिकों और वैक्सीन …

अपने देश में कोरोना की दो वैक्सीन को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिलने के बाद से सियासत और बयानबाजी तेज हो गई है। सबसे पहले इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आपत्तिजनक बयान दिया। हालांकि जब वह अपने बयान पर घिरने लगे तो वैज्ञानिकों और वैक्सीन को लेकर कुछ भी कहने की अपनी बात से मुकर रहे हैं।

वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के प्रमुख अदार पूनावाला ने जब कहा कि कोरोना के खिलाफ केवल तीन टीके प्रभावी हैं- फाइजर, मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और बाकी सिर्फ ‘पानी की तरह सुरक्षित’ हैं तो भारत बायोटेक के चीफ कृष्णा इल्ला ने उन पर पलटवार किया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कोई भी हमारे वैक्सीन के ट्रायल पर सवाल न उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोई भी टीवी पर आकर कुछ भी कह रहा है।

कुछ लोगों के जरिए वैक्सीन का राजनीतिकरण किया जा रहा है। वैसे भारत बायोटेक के चीफ की बात से असहमत नहीं हुआ जा सकता। उनका कहना सही है। कोरोना महामारी के संकट के बाद जब समूचा विश्व ही वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, ऐसे में यदि भारत में दो वैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी मिलने के बाद देश भर में इसके टीकाकरण का वृहद अभियान चलाने की तैयारी में केंद्र सरकार जुटी हुई है तो इस पर सवाल उठाना अनुचित ही हैं। वह भी तब जब लोगों की जान पर मंडराते संकट से बचाव जैसा अहम मसला हो तो किसी को भी आधारहीन बात नहीं करनी चाहिए।

यह अफसोसजनक ही है कि हमारे देश में जब व्यापक स्तर पर कोई काम होता है तो चार मुंह-चार बातें होने लगती हैं। जो विशेषज्ञ नहीं होते, वे भी लोगों को भरमाने के लिए अतािर्कक बात करने लगते हैं। पोलियो ड्राप के मामले में भी ऐसा ही हुआ, जैसा कोरोना वैक्सीन के मामले में हो रहा है। कभी इसे नपुंसक बनाने वाली वैक्सीन कहा जाने लगता है तो कभी किसी एक संप्रदाय के लिए साजिश। अफसोस तब होता है, जब ऐसी अफवाहों पर समाज का एक तबका सोचे-समझे बिना यकीन करने लगे।

हमारे देश में कोरोना वैक्सीन को लेकर जब गर्व की बात होनी चाहिए, तब इसके विरोध में स्वर उठाए जाने लगें तो दूसरे देशों को भी सवाल उठाने का मौका मिलने लगता है। यह हमारी कमजोरी है, अक्लमंदी नहीं, इस बात को समझना होगा। विपक्ष को जब कोरोना संकटकाल में सरकार को हर कदम पर साथ देना चाहिए, तब बेवजह राजनीति करना उचित नहीं है।