हल्द्वानी : लोकभाषा उन्नयन में कुमगढ़ पत्रिका की भूमिका पर हुई गोष्ठी
हल्द्वानी,अमृत विचार। एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक भारतेंदु हरिश्चन्द्र की पुण्यतिथि पर लोकभाषा उन्नयन में कुमगढ़ पत्रिका की भूमिका विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कुमगढ़ पत्रिका के सम्पादक दामोदर जोशी देवांशु ने कहा कि नई पीढ़ी जितना …
हल्द्वानी,अमृत विचार। एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक भारतेंदु हरिश्चन्द्र की पुण्यतिथि पर लोकभाषा उन्नयन में कुमगढ़ पत्रिका की भूमिका विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कुमगढ़ पत्रिका के सम्पादक दामोदर जोशी देवांशु ने कहा कि नई पीढ़ी जितना तकनीकी रूप से सक्षम होती जा रही है, उतना ही अपनी जड़ों से कटती जा रही है। बोली- बानी, खान-पान, रहन-सहन ही हमें हमारे लोक से जोड़ते हैं।
कुमगढ़ पत्रिका की उपसंपादक भावना जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम सभी को लोकभाषाओं को जीवन का अंग बनाते हुए भारतेन्दु हरिश्चंद्र के विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। उन्होंने उनकी प्रसिद्ध कविता का वाचन किया-
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल
अंग्रेज़ी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन
पै निज भाषाज्ञान बिन, रहत हीन के हीन
उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय
निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय
कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रोफेसर डॉ दीपा गोबाड़ी ने कुमाउनी और गढ़वाली भाषा के लिए कुमगढ़ पत्रिका के सराहनीय योगदान पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने साहित्यकार ललितमोहन रयाल की जीवनी विधा में प्रकाशित होने वाली रचना कारी तु कब्बी न हारी में गढ़वाली शब्दों के सुसंगत प्रयोग की चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ जगदीश जोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रभा पंत, सन्तोष मिश्र, चंद्रा खत्री, विमला सिंह,देवयानी भट्ट, आशा हरबोला, जयश्री भंडारी, भवान सिंह आदि उपस्थित थे।
