लखनऊ: हर साल मरते रहे दर्जनों, कार्रवाईयां हुईं, लेकिन नहीं रुका जहरीली शराब का कारोबार
अमित सिंह, लखनऊ। यूपी के बुलंदशहरमें जहरीली शराब पीने से अभी तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इससे सरकार और आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। नये साल 2021 का ये पहला मामला है लेकिन, पिछले सालों की घटनाओं पर नजर दौड़ायें तो पता चलेगा कि हर साल ही यूपी में जहरीली …
अमित सिंह, लखनऊ। यूपी के बुलंदशहरमें जहरीली शराब पीने से अभी तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इससे सरकार और आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। नये साल 2021 का ये पहला मामला है लेकिन, पिछले सालों की घटनाओं पर नजर दौड़ायें तो पता चलेगा कि हर साल ही यूपी में जहरीली शराब से दर्जनों परिवार उजड़ जाते हैं।
साल दर साल जहरीली शराब से लोगों की मौतें होती गईं। सरकार की ओर से निकम्मे और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गईं लेकिन जहरीली शराब खेल चलता रहा। बीते साल 2020 में ही लखनऊ से लेकर प्रयागराज और मेरठ तक कई घटनायें हुईं, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गयी।
प्रयागराज- डेढ़ महीने पहले ही 21 नवम्बर को प्रयागराज के फूलपुर में छह लोगों की जहरीली शराब पीने से जान चली गयी। फूलपुर के अमिलिया गांव में सरकारी ठेके से ही शराब खरीदकर लोगों ने पी थी।
लखनऊ- 13 नवम्बर को लखनऊ में जहरीली शराब पीने से छह की मौत हो गई। बंथरा इलाके में सरकारी ठेके से शराब खरीदने की बात सामने आयी थी।
फिरोजाबाद- लखनऊ की घटना के चंद दिनों बाद ही 17 नवम्बर को फिरोजाबाद में भी जहरीली शराब से तीन की मौत हो गई।
बागपत, मेरठ- 10 सितम्बर को बागपत और मेरठ में जहरीली शराब के कारण की मौत हो गई। बागपत के चमरावल गांव में पांच जबकि मेरठ के जानी हलके में दो की मौत हो गयी थी।
कानपुर- 12 अप्रैल 2020 को कानपुर के घाटमपुर में जहरीली शराब से दो लोगों की मौत हो गई थी। इस तरह सभी मौतों को जोड़ दिया जाये तो ये संख्या 24 पर जाकर रूकती है. इसमें कुछ इजाफा ही हुआ होगा क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इलाज के दौरान मौत से जूझ रहे थे।
साल दर साल लोगों की होती रहीं मौतें
2008 में 16 लोगों की मौत। वहीं 2009 में 53 लोगों ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही 2010 में 62, 2011- 13, 2012- 18 , 2013- 52 लोगों की मौत हो गई। 2014 में पांच तो 2015 में जहरीली शराब से 59 लोगों की मौत हो गई। 2016- 41, 2017- 18, 2018- 17 लोगों की जान जहरीली शराब पीने से चली गई। इसके अलावा साल 2019 में भी बड़े पैमाने पर मौतें हुई थीं। सहारनपुर और कुशीनगर में दर्जनों लोग मौत की नींद सो गये थे। 2009 में सहारनपुर में 32, 2010 में वाराणसी में 20, 2013 में आजमगढ़ में 40, 2016 में लखनऊ में 36 और साल 2016 में ही एटा में 41 लोगों की जान गई थी।
