शराब का कहर
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जहरीली शराब ने फिर अपना कहर बरपाया है। पिछले वर्ष नवंबर माह में भी प्रदेश के लखनऊ, फिरोजाबाद, हापुड़, मथुरा, प्रयागराज समेत कई जगहों पर जहरीली शराब से मौतें हुई थीं। इसके अलावा भी आगरा, बागपत व मेरठ में जहरीली शराब ने लोगों की जान ली थी। उस समय प्रदेश …
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जहरीली शराब ने फिर अपना कहर बरपाया है। पिछले वर्ष नवंबर माह में भी प्रदेश के लखनऊ, फिरोजाबाद, हापुड़, मथुरा, प्रयागराज समेत कई जगहों पर जहरीली शराब से मौतें हुई थीं। इसके अलावा भी आगरा, बागपत व मेरठ में जहरीली शराब ने लोगों की जान ली थी। उस समय प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों की संपत्ति कुर्क करने और उन पर गैंगस्टर लगाने के आदेश दिए थे। प्रदेश में किसी भी रूप में अवैध और जहरीली शराब का निर्माण और बिक्री बंद हो सके इसके लिए विशेष टीम बनाने का निर्णय लिया गया था।
आखिर क्या कारण है कि कुछ दिखावटी कदमों की बजाय सरकार जहरीली शराब के माफियाओं पर कार्रवाई करने में नाकाम रही।बुलंदशहर की ताजा घटना बताती है कि प्रदेश में अवैध शराब का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। जब भी इस तरह की घटनाएं होती हैं तो फौरी और रस्मी तौर पर कुछ अधिकारी कर्मचारी निलंबित कर दिए जाते हैं और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देकर पिंड छुड़ा लिया जाता है लेकिन ऐसी कार्रवाई किसी पर नहीं होती, जिससे कोई सबक ले सके।
जिस तरह शराब का धंधा चलता आ रहा है, उससे तो लगता है कि यह व्यवस्था का हिस्सा बन गया है। यह कोई छिपी बात नहीं है कि अवैध शराब का धंधा स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से ही चल पाता है। कच्ची शराब का सेवन आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों व निम्नवर्गीय बस्तियों में रहने वाले लोग करते हैं। इन्हीं इलाकों में अवैध व कच्ची शराब का कारोबार बड़े पैमाने पर चलता है। पुलिस और प्रशासन आंखें मूंदे रहता है, क्योंकि यह धंधा उगाही के बड़े स्रोत है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन कटघरे में आएगा ही।
प्रदेश में पिछले दिनों हुई जहरीली शराब की घटनाओं के बाद यदि प्रशासन शराब माफिया के खिलाफ अभियान चलाता तो बुलंदशहर में लोगों की जान जाने से बच सकती थी। हादसों के बाद भी जिम्मेदार लोगों की आंखें नहीं खुलतीं और पिछली घटनाओं से कोई सबक लिया नहीं जाता।
शराब की बिक्री राज्य सरकारों के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत होती है, इसलिए चाहे किसी भी पार्टी की सरकार सत्ता में रहे शराब माफिया पर इसका कोई असर नहीं पड़ता और अवैध शराब के धंधे पर लगाम नहीं लग पाती। यदि सरकार ठान ले तो जहरीली शराब बेचने वालों का सफाया करना कोई मुश्किल काम नहीं है।
