बरेली: हादसों की असली वजह जानने को शुरू हुआ प्रशिक्षण
बरेली, अमृत विचार। हादसों पर लगाम लगाने के लिए हादसों की वजह जानना अहम है। मौजूदा समय में हादसों की वजहों का सही पता नहीं लगता है। भविष्य में हादसे की वजह तुरंत पता चल जाएगी। ऐसा आईआरएडी (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटा बेस) एप के जरिए होगा। इस एप पर एक्सीडेंट का डाटा घटना स्थल …
बरेली, अमृत विचार। हादसों पर लगाम लगाने के लिए हादसों की वजह जानना अहम है। मौजूदा समय में हादसों की वजहों का सही पता नहीं लगता है। भविष्य में हादसे की वजह तुरंत पता चल जाएगी। ऐसा आईआरएडी (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटा बेस) एप के जरिए होगा। इस एप पर एक्सीडेंट का डाटा घटना स्थल पर ही ऑनलाइन फीड होगा।
इसकी जानकारी पुलिस के साथ-साथ परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के पास भी पहुंच जाएगी। इन विभागों के एप भी इस एप से जुड़ेंगे। प्रोजेक्ट को लागू करने से पहले बरेली में शुक्रवार को पहला प्रशिक्षण पुलिस लाइंस में प्रोजेक्ट के रोल आउट मैनेजर के द्वारा 75 पुलिसकर्मियों को दिया गया।
मौजूदा समय में प्रति वर्ष साल के अंत में हादसों का डाटा तैयार किया जाता है। इसके लिए सभी थानों से रिपोर्ट मांगी जाती है। रिपोर्ट में एफआईआर के हिसाब से थानों से जानकारी दी जाती है। अक्सर देखा गया है कि एफआईआर में वाहन चालक की गलती ही दर्ज करायी जाती है। इसके अलावा भी कई बार थानों से गलत सूचना भी दी जाती है। इसी आधार पर हादसों का डाटा तैयार किया जाता है। इसी डाटा के आधार पर हादसों के रोकने की योजना बनाई जाती है। लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से हादसों में कमी नहीं आ रही है।
तमिलनाडु में आईआरएडी के लांच होने के बाद 60 फीसदी हादसों में कमी आयी तो इसे सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के द्वारा इसे पूरे देश में लागू करने का आदेश जारी किया गया। मौजूदा समय में इसे उत्तर प्रदेश समेत 6 राज्यों में लागू किया जा रहा है। जिसमें उत्तर प्रदेश में बरेली समेत 16 जिलों में इसे पहले लागू किया जाएगा। बरेली में एनआईसी के द्वारा हिमांशु को रोलआउट मैनेजर नियुक्त किया गया है। शुक्रवार को हिमांशु के द्वारा एप में डाटा फीड करने को लेकर पुलिस लाइंस में प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के लिए सभी थानों से 3-3 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया था। प्रशिक्षण में करीब 75 पुलिसकर्मी शामिल हुए।
एनआईसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज कुमार ने बताया कि किसी भी हादसे की सूचना पर पहुंचने वाले पुलिसकर्मी को स्पॉट पर ही हादसे का डाटा फीड करना होगा। इसमें लिखना होगा कि हादसे की वजह क्या रही। जैसे वहां पर लाइट नहीं थी, वाहन की स्पीड तेज थी, मोड़ खतरनाक था, डिवाइडर सही नहीं बना था।
इसके अलावा हादसा किससे हुआ। हादसे में कितने लोगों की मौत हुई। कितने लोग घायल हैं। यह जानकारी भी फीड करनी होगी। इसमें घटना का फोटो व वीडियो भी अपलोड करना होगा। यह जानकारी तुरंत एप के माध्यम से ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग को भी पहुंच जाएगी। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी के बाद संयुक्त प्रशिक्षण होगा। इसमें पुलिस के साथ ट्रांसपोर्ट व स्वास्थ्य विभाग और नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के लोग भी शामिल होंगे।
वर्ष 2020 में हादसे
680- हादसे
346- मौत
425- घायल
