हल्द्वानी: यहाँ लगती है गुड़ खरीदने को लोगों की भीड़

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हल्द्वानी,अमृत विचार। सर्दियों में गुड़ की डिमांड बढ़ना आम बात है, लेकिन हल्द्वानी शहर में अगर गुड़ खरीदने की बात आती है तो यहां पंचायत घर के पास गांव फूलचौड़ पर एक छोटी सी दुकान के बाहर आपको खासी भीड़ देखने को मिलेगी। इस गुड़ की मिठास इतनी खास है कि लोग इसे खरीदने दूर-दूराज …

हल्द्वानी,अमृत विचार। सर्दियों में गुड़ की डिमांड बढ़ना आम बात है, लेकिन हल्द्वानी शहर में अगर गुड़ खरीदने की बात आती है तो यहां पंचायत घर के पास गांव फूलचौड़ पर एक छोटी सी दुकान के बाहर आपको खासी भीड़ देखने को मिलेगी। इस गुड़ की मिठास इतनी खास है कि लोग इसे खरीदने दूर-दूराज से पहुंचते हैं। ग्राहकों की इतनी भीड़ होती है कि बिक्री के लिए गुड़ की मात्रा भी कम पड़ जाती है। ठीक दोपहर दो बजे दुकान खुलती है। लेकिन दुकान खुलने से पहले ही लोग यहां आकर बैठ जाते हैं, जिससे उन्हें उनके हिस्से का गुड़ मिल जाए। नहीं मिलने पर कई लोग अगले दिन आकर गुड़ ले जाते हैं।

इस गुड़ की पहचान है पान सिंह पडियार से। वह भले ही अब जीवित नहीं हैं, लेकिन उनके कोल्हू के बने गुड़ की मिठास आज भी लोगों की जुबान पर घुली है। अपने पिता के काम को साल 2009 से उनके बेटे मोहन आगे बढ़ा रहे हैं। उनका यह कारोबार 50 साल से भी ज्यादा पुराना है। हालांकि बैल की जगह अब कोल्हू बिजली से चलता है। लेकिन बाकी सारा बनाने का तरीका वही पारंपरिक है। बिना केमिकल और मिलावट के तैयार इस गुड़ की लोकप्रियता पूरे कुमाऊं में है। हल्द्वानी के साथ ही रुद्रपुर, बाजपुर, अल्मोड़ा, कौसानी, नैनीताल के लोग यहां पहुंचते हैं। मोहन ने बताया कि महीने में इन दिनों पांच कुंतल तक की खपत हो जा रही है।

वहीं मेवा वाले गुड़ की डिमांड अधिक है। इसमें सफेद तिल, काजू, बादाम और मूंगफली मिलाई जाती है। इसकी सफाई से लेकर तैयार होने तक की पूरी प्रक्रिया पारंपरिक तरीके से होती है। जहां अन्य फैक्ट्रियों में गन्ने के रस को साफ करने के लिए रसायन आदि का उपयोग किया जाता है, लेकिन यहां रस की सफाई के लिए भिंडी की राल मिलाई जाती है।

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