बरेली: हाथों से खून बहाने के बाद भी नहीं मिल रही दो वक्त की रोटी

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। कोरोना संक्रमण ने कोई एक दो कारोबार नहीं बल्कि सभी कारोबारों पर अपना गहरा असर छोड़ा है। इस समय में सबसे ज्यादा मुसीबत में मांझा करोबारी जूझ रहे हैं। हाल ऐसा है कि हाथों को चोटिल करने, खून बहाने के बाद भी ढंग से पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी …

अमृत विचार, बरेली। कोरोना संक्रमण ने कोई एक दो कारोबार नहीं बल्कि सभी कारोबारों पर अपना गहरा असर छोड़ा है। इस समय में सबसे ज्यादा मुसीबत में मांझा करोबारी जूझ रहे हैं। हाल ऐसा है कि हाथों को चोटिल करने, खून बहाने के बाद भी ढंग से पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी मुहैया नहीं हो रही है।

ऑल यूपी सूती धागा-मांझा मजदूर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष सरताज ने बताया कि कोरोना संक्रमण से पहले मांझे का कारोबार काफी अच्छा था। मगर जब से संक्रमण हुआ है, तब से हालात ऐसे हो गए हैं कि उनके पास आर्डर तक नहीं आते हैं। मांझे का काम करने वाले करीब 25 हजार परिवार इस समय भारी संकट और मुसीबत से जूझ रहे है।

मांझा बनाने वाले लोगों ने परेशान होकर दूसरे कार्यों को पकड़ लिया है। कारोबारियों के पास जो मांझा बनाने के आर्डर आते भी है, मगर उन्हें उसमें बचत नहीं होती। पहले के मुकाबले इस समय केवल 50 फीसदी ही काम हो पा रहा है। अन्यथा पूरे देश में बरेली का मांझा मशहूर है। कोरोना से पहले मांझे की इतनी डिमांड आती थी कि यहां से आर्डर पूरे करने में समस्या होती थीं।

दलालों की वजह से मंहगा मिलता है धागा
सरताज बताते हैं कि कोरोना से पहले मांझा कारोबारी खुद सूती धागा बनाने वाली कंपनियों से संपर्क कर धागा खरीद लिया करती थी। जिससे उन्हें धागा कुछ सस्ता पड़ता था। मगर अब बीच में कुछ दलालों ने धागा खरीद लिया है। वह कारोबारियों को मंहगे में सप्लाई करते हैं। इसकी वजह से मांझा बनाने में जो बचत थी। उस पर भी अंकुश सा लग गया है।

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