अस्पताल में हादसा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

महाराष्ट्र के भंडारा जिला अस्पताल में 10 नवजात शिशुओं के जिंदा जल जाने की घटना हृदय विदारक है। जन्म लेने के कुछ समय बाद ही असमय काल का शिकार हुए इन नवजात के माता-पिता पर क्या बीत रही होगी, यह समझा जा सकता है। जिनके जन्म लेने के बाद परिवार में खुशी का माहौल था …

महाराष्ट्र के भंडारा जिला अस्पताल में 10 नवजात शिशुओं के जिंदा जल जाने की घटना हृदय विदारक है। जन्म लेने के कुछ समय बाद ही असमय काल का शिकार हुए इन नवजात के माता-पिता पर क्या बीत रही होगी, यह समझा जा सकता है। जिनके जन्म लेने के बाद परिवार में खुशी का माहौल था और माता-िपता बच्चों के जल्द घर जाने की राह तक रहे थे। उनकी सारी खुशी और उम्मीदों पर इस हादसे ने कुठराघात किया ही है, इस अस्पताल में लापरवाही की हद की तस्वीर भी सामने ला दी है।

फिलहाल भले ही अब तक की जांच में आग लगने का कारण सामने नहीं आ सका है लेकिन यह तो साफ है कि आग लगने के बाद उस पर तत्काल काबू पाने के पूर्व से ही इस अस्पताल में कोई इंतजाम नहीं थे। यदि आग लगने के तत्काल बाद आग पर काबू पा लिया गया होता तो निश्चित ही इतना बड़ा हादसा नहीं होने पाता। अफसोस यह है कि जब ऐसे हादसे होते हैं, तभी हम जागते हैं, यही विडंबना है। सरकारी सिस्टम से संचालित अस्पतालों की बात तो छोड़िए, निजी अस्पतालों में भी आग लगने से रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं होते।

यदि इस अस्पताल में आग शॉर्ट-सर्किट से लगी तो सवाल यह है कि शॉर्ट-सर्किट की नौबत ही क्यों आने दी गई? महाराष्ट्र सरकार ने मृतक नवजात शिशुओं के परिवार के सदस्यों के लिए पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा की घोषणा कर दी है लेकिन क्या मुआवजे से उनको मिले जख्म को भरा जा सकता है? निस्संदेह इस हादसे में लापरवाही अस्पताल प्रशासन की ही है लेकिन आखिर उन मां-बाप का क्या दोष, जिन्होंने अपने नवजात शिशुओं को इलाज के लिए अस्पताल को सौंपा था।

अस्पताल प्रशासन को तो अपने यहां भर्ती इन नवजातों को नया जीवन देना था, न की अपनी लापरवाही से इनको मौत की नींद सुला देना। अस्पताल की यह लापरवाही क्षम्य तो बिल्कुल नहीं हो सकती, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ एक माता की कोख सूनी कर दी और एक पिता की उम्मीदों का चिराग बुझा दिया। इन नवजात शिशुओं में कुछ बड़े होने के बाद पढ़-लिखकर आदर्श नागरिक बनते और हो सकता है कि समाज के लिए कोई उदाहरण पेश करते।

इस हादसे से देश के बाकी अस्पतालों के प्रशासन को भी सबक लेना चाहिए। ऐसा हादसा फिर कभी न हो पाए, इसके लिए अपने-अपने अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए। सरकार को भी इस लापरवाही पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।