पाकिस्तान में धर्मांतरण

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Edited By Amrit Vichar
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पाकिस्तान में हिंदू महिला शिक्षक को जबरन इस्लाम कबूल कराया गया है। हाल की यह घटना पड़ोसी देश के सिंध प्रांत के बलूचिस्तान में इस तरह की कोई पहली घटना नहीं है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार …

पाकिस्तान में हिंदू महिला शिक्षक को जबरन इस्लाम कबूल कराया गया है। हाल की यह घटना पड़ोसी देश के सिंध प्रांत के बलूचिस्तान में इस तरह की कोई पहली घटना नहीं है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के लिए बदनाम पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हर साल 1000 से ज्यादा लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराकर उनको मुस्लिम बनाया जाता है।

इस रिपोर्ट के अनुसार सिंध के सिर्फ बादिन इलाके में ही बीते कुछ समय में 102 हिंदुओं को जबरन इस्लाम कबूल कराया गया। मानवाधिकार संस्था मूवमेंट फॉर सॉलिडैरिटी एंड पीस (एमएसपी) के अनुसार, पाकिस्तान में हर साल 12 से 25 साल की 1000 से ज्यादा हिंदू, सिख और ईसाई लड़कियों का अपहरण करके उनकाे जबरन मुस्लिम बनाने के बाद इस्लामिक रीित-रिवाज से निकाह कराया जाता है।

पाकिस्तान में हाल ही में जिस हिंदू शिक्षिका का अपहरण करने के बाद धर्मांतरण कराया गया उसका नाम एकता से बदलकर आयशा कर दिया गया। वह एक स्कूल में बिना भेदभाव सारे बच्चों को शिक्षित करने का काम करती थी। पाकिस्तान में लगातार हो रहे अल्पसंख्यकों के धर्मांतरण और उनका उत्पीड़न बेहद चिंता का विषय है। भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में जहां अल्पसंख्यकों के साथ बेहतर से बेहतर सुलूक करने का नियम है।

संविधान में उनको खास संरक्षण और नौकरियों में आरक्षण तथा कई योजनाओं के प्रावधान किए गए हैं, उसके विपरीत पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों से मानवता के विरुद्ध किया जाने वाला बर्ताव वहां के लोगों की न सिर्फ इस्लामी कट्टरता को प्रदर्शित करता है, बल्कि मानवाधिकारों के संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध भी है। इसको लेकर कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर चिंता जताई जा चुकी है। अमेिरका के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में पाकिस्तान को धार्मिक आजादी के उल्लंघन पर खास चिंता वाला देश घोषित किया।

अफसोस यह है कि पाकिस्तान में धर्मांतरण और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न में जुटीं इस्लाम को बढ़ावा देने वाली कई संस्थाएं और लोगों पर वहां की सरकार का भी कोई नियंत्रण होना दूर, उल्टा उनको संरक्षण हासिल है। ऐसे मामले बहुतायत होते रहते हैं और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान इस पर चुप्पी साध जाते हैं।

पाकिस्तानी पुलिस और स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। इससे कट्टरवादियों के हौसले बुलंद रहते हैं। भारत कई बार यह मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा चुका है। अब अल्पसंख्यक हितों के लिए जरूरत इस बात की है कि पाकिस्तान को इस मुद्दे पर प्रभावी दबाव बनाकर रोका जाए।