क्या आप भी करते हैं प्लास्टिक के पैन का इस्तेमाल?, जरूर पढ़ें ये खबर
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने व्यवस्था दी है कि प्लास्टिक की कलम ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम’ के दायरे में आती हैं और उसने अपशिष्ट के निपटान के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) व्यवस्था को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया गया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली एक खंडपीठ …
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने व्यवस्था दी है कि प्लास्टिक की कलम ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम’ के दायरे में आती हैं और उसने अपशिष्ट के निपटान के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) व्यवस्था को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया गया है।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली एक खंडपीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को ईपीआर को लेकर राज्य पीसीबी और राज्य स्तरीय निगरानी समितियों से भी समन्वय स्थापित करने को कहा।
पीठ ने कहा, ”हालांकि कलम का नियमों में विशेष रूप से जिक्र नहीं है, लेकिन वे प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के नियम तीन (ओ) के तहत ‘प्लास्टिक’ की परिभाषा में शामिल हैं, अत: कलम भी वैधानिक ढांचे के दायरे में आती हैं।” अधिकरण ने पर्यावरण पर प्रतिकूल असर डाल रही प्लास्टिक की कलमों के बेरोक-टोक इस्तेमाल के खिलाफ अवनी मिश्रा की याचिका की सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया।
