बेसिर-पैर की अफवाहें
यह खुराफाती मानसिकता की हद ही है कि देश में बनाई गईं कोरोना वैक्सीन की विश्वसनीयता को लेकर तरह-तरह की अफवाह फैलाई जा रही हैं। कुछ खुराफाती वैक्सीन में सुअर और कुत्ते का खून होने की अफवाह फैला रहे हैं तो कुछ इसे सरकार की साजिश करार देने पर आमादा हैं। बरेली में शहर की …
यह खुराफाती मानसिकता की हद ही है कि देश में बनाई गईं कोरोना वैक्सीन की विश्वसनीयता को लेकर तरह-तरह की अफवाह फैलाई जा रही हैं। कुछ खुराफाती वैक्सीन में सुअर और कुत्ते का खून होने की अफवाह फैला रहे हैं तो कुछ इसे सरकार की साजिश करार देने पर आमादा हैं।
बरेली में शहर की पॉश कालोनी राजेंद्रनगर के कुछ घरों में रविवार को सुबह लिफाफे में दो पेज के हस्तलिखित पर्चे फेंककर खुराफातियों ने भ्रांतियां पैदा करने की कोशिश करते हुए वैक्सीन न लगवाने की लोगों से अपील की। एक समुदाय में भी ऐसी अफवाहें उड़ाने की कोशिश की गई हैं कि वैक्सीन हराम है।
सवाल ये हैं कि ऐसी अफवाहें फैलाने वालों का मकसद क्या है? लोग वैक्सीन न लगा पाएं, इससे उनको क्या हासिल हो जाएगा? असल में, हमारे देश में आज भी एक बड़ा तबका ऐसा है, जो कम जागरूक होने और अशिक्षा के चलते किसी भी अफवाह को वैज्ञानिकता की कसौटी पर परखने के बजाय रूढ़ियों और ढकोसलों को ज्यादा महत्व देता है।
पोलियो वैक्सीन के मामले में भी ऐसा ही किया गया। अफवाहें उड़ाई गईं कि पोलियो ड्राप बच्चों को नपुंसक बना देगी। पिछड़े इलाकों में रहने वाले अशिक्षित और कम जागरूक लोगों ने लंबे समय तक बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने से परहेज किया था। खुराक पिलाने गए हेल्थ वर्करों को विरोध का सामना भी करना पड़ा लेकिन आज हम उसी पल्स-पोलियो अभियान की बदौलत पोलियो की बीमारी को देश से खत्म करने में कामयाब हो पाए।
अब उसी पोलियो ड्राप को अफवाह के दायरे में लाने की कोशिश करने वालों के मुंह पर ताला लगा हुआ है लेकिन उसमें मिली नाकामयाबी के बाद अब ऐसे ही खुराफाती कोरोना की वैक्सीन के मामले में अपनी हसरतों को पूरा करना चाहते हैं, इसीलिए कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रांतियां फैलाने की कोशिशों के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।
सच यह है कि ऐसे खुराफाती न सिर्फ समाजविरोधी बल्कि देश के भी विरोधी हैं। कोरोना जैसी विश्वव्यापी महामारी आज जब दुनिया में लाखों लोगों की जान ले चुकी है। ऐसे में, इससे मानवता को बचाने के लिए हमने जो टीका विकसित किया है, वह बड़ी कामयाबी है। जब विशेषज्ञ कह चुके हैं कि टीका सुरक्षित है, ऐसे में इसको लेकर अफवाह का कोई औचित्य नहीं रह जाता। हमें तो देश की इस कामयाबी का खुले मन से स्वागत करना चाहिए।
