आंदोलन किसका

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Edited By Amrit Vichar
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देश की राजधानी दिल्ली को चारों ओर से घेरकर किसान दो महीने से डटे हुए हैं। किसान तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। वहीं सरकार भी कानूनों को वापस न लेने की बात पर अडिग है। सरकार व किसान संगठनों के साथ हुई नौ दौर की बातचीत आंदोलन समाप्त …

देश की राजधानी दिल्ली को चारों ओर से घेरकर किसान दो महीने से डटे हुए हैं। किसान तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। वहीं सरकार भी कानूनों को वापस न लेने की बात पर अडिग है। सरकार व किसान संगठनों के साथ हुई नौ दौर की बातचीत आंदोलन समाप्त करा पाने में नाकाम रही है।

किसान अड़े हैं कि कानून वापसी से पहले उनकी घर वापसी नहीं होगी। गौर करने वाली बात है कि बहुत बड़ी संख्या में छोटे एवं भूमिहीन किसान इस आंदोलन से गायब हैं। क्या किसान आंदोलन जमींदारों का आंदोलन बनकर रह गया है। केंद्र सरकार इस बात को जानती है कि यह अभिजात्य वर्ग का आंदोलन है। इसमें बहुत बड़ी संख्या में बहुजन किसान शामिल नहीं है। इसलिए वह निश्चिंत है।

गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली करने के मुद्दे पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने भी मुद्दे को दिल्ली पुलिस पर छोड़ दिया। अदालत ने कहा कि दिल्ली में किसे प्रवेश देना चाहिए या नहीं, इस बारे में फैसला करने का पहला अधिकार पुलिस को है।

इसके अलावा किसानों और सरकार के बीच मंगलवार को 10वें दौर की वार्ता होनी है। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमार ने कहा कि उनकी अपेक्षा है कि किसान 19 तारीख को हर मुद्दे पर चर्चा करें, किसान कानून वापसी के अलावा और क्या विकल्प चाहते हैं। उन्हें सरकार के सामने प्रस्तुत करें, तो सरकार जरूर पूरी गंभीरता के साथ उनकी समस्याओं और उनकी आपत्ति पर विचार करने को तैयार है।

विडंबना है कि सरकार ने तीन-तीन कानून किसानों के लिए बनाए लेकिन कृषि कानून में भूमिहीन किसानों के लिए कुछ नहीं है। चाहे एमएसपी की बात करें या उर्वरक में छूट देने की। सभी सुविधा भूस्वामी पर आधारित है। छोटे कृषि समान उपकरण से लेकर ट्रैक्टर तक की सुविधाएं उन्हें ही मिलती हैं, जिनके पास जमीन हैं।

यदि देखें तो यह आंदोलन भूमिहीन किसानों के नजरिए से भी अभिजात वर्ग का आंदोलन है। यह बड़े भूमिदार का आंदोलन है। अगर इनकी मांगों पर गौर करें तो पाते हैं कि खेतों में काम करने वाले वास्तविक मजदूर किसान के लिए यहां कुछ भी नहीं है। इस कारण खेतिहर मजदूर गरीब किसान के लिए इस आंदोलन का क्या कोई औचित्य है। सरकार की तरफ से न सही लेकिन किसान आंदोलन में इनके लिए कुछ तो होता।