भारत और नेपाल

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पिछले हफ्ते नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावाली की तीन दिवसीय भारत यात्रा से दोनों देशों भारत और नेपाल के रिश्तों में फंसे पेच में सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं। नेपाल ने पिछले साल एक नए राजनीतिक मानचित्र का प्रकाशन किया था और उसमें तीन भारतीय क्षेत्रों- लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने हिस्सों …

पिछले हफ्ते नेपाली विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावाली की तीन दिवसीय भारत यात्रा से दोनों देशों भारत और नेपाल के रिश्तों में फंसे पेच में सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं। नेपाल ने पिछले साल एक नए राजनीतिक मानचित्र का प्रकाशन किया था और उसमें तीन भारतीय क्षेत्रों- लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को अपने हिस्सों के तौर पर दर्शाया था, जिसके बाद दोनों के बीच संबंधों में तनाव आ गया था।

यही नहीं कोरोना काल में नेपाल ने भारत से लगी अपनी सीमा को भी बंद कर दिया था, जिसके चलते भी दोनों देशों बीच रिश्तों में खटास आ गई थी। इसके बाद रही सही कसर नेपाल में चीन के सीधे हस्तक्षेप से बढ़ गई थी। सीमा विवाद के बाद रिश्तों में तनाव आने के बाद दोनों पक्षों के बीच यह पहली राजनीतिक यात्रा थी। वार्ता के बाद संदेश मिला कि सीमा विवाद के बीच भारत और नेपाल के रिश्तों में मिठास घोलने की कोशिश जारी है।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी ज्ञावाली से मुलाकात के बाद कहा कि भारत और नेपाल के संबंध असीमित संभावनाओं वाले हैं। भारत के विदेशमंत्री जयशंकर और ज्ञावाली ने सीमा प्रबंधन, संपर्क, व्यापार, ऊर्जा, तेल तथा गैस, जल संसाधन, क्षमता निर्माण और पर्यटन समेत द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर बातचीत की।

यह दौरा इस मायने में महत्वपूर्ण था कि नेपाली विदेशमंत्री के भारत आने से ठीक पहले वहां के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा था कि वो कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा के 370 वर्ग किलोमीटर के इलाके को नेपाल के अधीन लाना चाहते हैं। फिर भी ज्ञावाली के दौरे की एक प्रमुख बात ये रही कि वो कोरोना वायरस की वैक्सीन की आपूर्ति के लिए भारत को राजी कर पाए।

इससे पहले पिछले साल अक्टूबर माह से लेकर नवंबर तक भारत की तरफ से रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के निदेशक सामंत कुमार गोयल, विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला और भारतीय सेना के प्रमुख एमएम नरवणे ने बारी-बारी से नेपाल का दौरा किया और दोनों देशों के बीच पैदा हुईं गलतफहमियों को कम करने की कोशिश की।

इसका संदेश गया कि भारत दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार जारी रखना चाहता है। दोनों देशों के बीच कुछ समस्याएं हैं, उन्हें बातचीत के माध्यम से हल किया जा सकता है और भारत का मानना है कि ये मुद्दे शांतिपूर्वक तरीके से सुलझाए जा सकते हैं। अब नेपाल के विदेशमंत्री की यात्रा का संदेश रहा कि दोनों देश राजनीतिक संवाद की राह पर लौटने का माहौल बना रहे हैं।