बरेली: शिक्षण संस्थानों में युवाओं को तंबाकू से किया जाएगा दूर
बरेली, अमृत विचार। शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद पर पूरी तरह से रोक लगी है। शिक्षण संस्थानों के अंदर भी तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है लेकिन परिसर के बाहर तंबाकू की बिक्री भी हो रही है और इसका परिसर के अंदर इस्तेमाल भी हो रहा है। …
बरेली, अमृत विचार। शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद पर पूरी तरह से रोक लगी है। शिक्षण संस्थानों के अंदर भी तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है लेकिन परिसर के बाहर तंबाकू की बिक्री भी हो रही है और इसका परिसर के अंदर इस्तेमाल भी हो रहा है। तंबाकू से सबसे ज्यादा प्रभावित युवा हो रहे हैं। ऐसे में युवाओं को तंबाकू से दूर करने के लिए शिक्षण संस्थानों से ही प्रयास किए जाएंगे।
शासन के निर्देश पर संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डा. हिरेंद्र प्रताप सिंह ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेल्फेयर की संशोधित गाइडलाइंस फॉर टोबेको फ्री एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन (टीओएफईआई) के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। संशोधित गाइडलाइंस का पालन कराना शिक्षण संस्थानों के लिए बड़ी चुनौती होगा।
बरेली में कई बार पुलिस ने हुक्का बार में छापेमारी कर युवाओं को पकड़ा है। इनमें से ज्यादातर छात्र थे। इसके अलावा कई बार छात्रों द्वारा नशा करने के मामले सामने आ चुके हैं। छात्र स्कूल-कॉलेज जाने के दौरान दोस्तों के साथ तंबाकू उत्पाद का इस्तेमाल करते हैं। यह उन्हें आसानी से उनके स्कूल-कॉलेज के बाहर ही मिल जाता है। शिक्षण संस्थान के मुख्य द्वार के पास ही दुकानों पर तंबाकू उत्पाद बिकते हैं। इन पर कोई भी रोक नहीं लग रही है।
यही वजह है कि शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए 18 दिसंबर को संशोधित टीओएफआई जारी की गई है। इसके तहत बताया गया है कि किस तरह से युवा तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल कर रहा है। गुटखा, खैनी, सिगरेट के साथ ई-सिगरेट, पाइप्स, पेन, ई-शीशा, वेप, ई-निकोटीन, फ्लेवर्ड हुक्का व अन्य तरीके से भी तंबाकू उत्पादों का सेवन कर अपने स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। गाइडलाइन में कई सर्वेक्षणों का भी जिक्र किया गया है।
इसमें बताया गया है कि ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे-2009 के अनुसार भारत में 13 से 15 वर्ष की उम्र के 14.6 फीसदी छात्र तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। ग्लोबल एडल्ट सर्वे 2016-17 के अनुसार भारत में 15 साल से उम्र के 28.6 फीसदी युवा तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। लगभग 27 करोड़ लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। भारत में प्रतिवर्ष 13 लाख और रोजाना 35 सौ लोग तंबाकू के सेवन से जान गंवा देते हैं। सेकेंड हैंड स्मोक यानी पैसिव स्मोकिंग भी काफी खतरनाक होती है।
रोकथाम के लिए बनाएं मॉनीटर
शिक्षण संस्थानों में तंबाकू के सेवन की रोकथाम के लिए सबसे पहले 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर रोक लगानी होगी। शिक्षण संस्थानो के मुख्य प्रवेश द्वार पर होर्डिंग व साइनेज बोर्ड लगाने होंगे। दीवारों पर भी तंबाकू फ्री लिखना होगा। शिक्षण संस्थान में तंबाकू फ्री जोन बनाना होगा। शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ शिक्षकों व कर्मचारियों के भी तंबाकू सेवन पर रोक लगानी होगी।
शिक्षक, स्टॉफ या छात्र में से किसी एक को मॉनीटर बनाना होगा जो निगरानी कर सके। उसका नंबर भी संस्थान में जगह-जगह लिखना होगा ताकि शिकायत पर कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा क्वाइटलाइन का भी नंबर देना होगा। छात्रों व अन्य को तंबाकू छोड़ने में मदद करनी होगी। शिक्षण संस्थानों के प्रमुख आसपास तंबाकू की बिक्री की रोक के लिए अधिकारियों को जानकारी देंगे। वह जुर्माना भी वसूल सकते हैं। शासन के द्वारा बोर्ड, साइनेज, दीवार पर क्या-क्या दिशा निर्देश लिए जांएगे, इसकी भी पूरी जानकारी दी गई है।
